केंद्र सरकार ने कक्षा नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को 15 अक्तूबर से खोलने की इजाजत दे दी है, लेकिन शिक्षा निदेशक हरियाणा ने 31 अक्तूबर तक शिक्षण व्यवस्था में कोई फेरबदल न करने को कहा है। उन्होंने 31 अक्तूबर तक पूर्व की भांति कक्षा नौ से 12 तक के 50 विद्यार्थियों को अभिभावक की अनुमति से परामर्श देते रहने को कहा है। इस आशय का पत्र प्रशासक की ओर से सभी डीईओ को भेजा गया है। इससे अब असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने अनलॉक 5.0 में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोलने की अनुमति दी थी, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को करना था। हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग से इस पर होम वर्क कराया, जिसमें शिक्षा विशेषज्ञों से परामर्श के साथ ही अभिभावकों की राय जानी गई थी। डीईओ विजय लक्ष्मी नांदल ने बताया कि करीब 75 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को कोरोना के डर से तब तक स्कूल भेजने के लिए सहमत नहीं है, जब तक वैक्सीन न बन जाए। वहीं माना गया कि बच्चे आपसे में मिलजुल कर रहते हैं। इससे सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों को बार-बार धोने के नियम का पालन भी न हो पाने की आशंका जताई गई थी। वहीं कई जिलों में कोरोना के मरीजों की संख्या में गिरावट नहीं हो रही है। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए 31 अक्तूबर तक स्कूलों की व्यवस्था में कोई बदलाव न करने का निर्णय लिया गया।
दो नवंबर से स्कूल खोलने की बन रही प्लानिंग
शिक्षा विभाग अब दो नवंबर से स्कूल खोलने की प्लानिंग कर रहा है। इस प्रस्ताव पर शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. महावीर सिंह ने इस शर्त पर अप्रूवल दी है कि अभिभावकों और निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों की राय जानने के बाद ही स्कूल खोलने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही कहा कि प्राइवेट स्कूलों के यह ऑप्शन दी जानी चाहिए कि चाहें तो वह स्कूल खोलें या न चाहें तो न खोलें। उन्होंने यह भी कहा है कि नौवीं से नीचे की क्लासें अभी ऑनलाइन ही चलेंगी। फिलहाल शिक्षा विभाग दो नवंबर से स्कूल खोलने की प्लानिंग बना रहा है, लेकिन अभिभावकों की राय के बाद ही ऐसा संभव हो सकेगा।