माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) में नकल के खेल की पुष्टि हो गई है। निजी मेडिकल कॉलेज के एक विद्यार्थी के लगाए गए आरोपों को जांच कमेटी ने भी सही पाया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट यूएचएस प्रशासन को सौंप दी है।
इसमें पुष्टि के बाद विवि प्रशासन ने भी सख्त कदम उठाते हुए निजी कॉलेज के 24 एमबीबीएस विद्यार्थियों व विवि के 17 कर्मचारियों समेत 41 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश कर दी है। डाॅ. सुखदेव सिंह चांदला को नया परीक्षा नियंत्रक नियुक्त कर दिया गया है। इस मामले में क्लर्क से लेकर उप अधीक्षक तक विवि के छह नियमित कर्मचारी निलंबित व छह अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं।
यूएचएस में पिछले दिनों सामने आए नकल के खेल मामले की जांच पूरी हो गई है। नकल के इस खेल का खुलासा होने के बाद जांच कमेटी गठित की गई थी। इसके तहत टीम ने निर्धारित 30 दिन में अपनी रिपोर्ट विवि कुलपति को सौंप दी है। रिपोर्ट में नकल के खेल की पुष्टि हो गई है। एमबीबीएस में पास होने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं में अलग-अलग लिखावट में उत्तर लिखने के अलावा पेन के प्रयोग की बात भी सही पाई गई है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 24 विद्यार्थियों के नकल में खेल में शामिल होने की बात कही है।
यही नहीं, इस खेल में विवि के 17 कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। ऐसे में चिकित्सक की जगह फर्जी एमबीबीएस तैयार होने की बात से इन्कार नहीं किया जा सकता। यूएचएस का परीक्षा नियंत्रक बदलते हुए डाॅ. सुखदेव चांदला को यह जिम्मेदारी सौंपी है। विवि की परीक्षा शाखा में भी बदलाव किया गया है। यहां क्लर्क से उप अधीक्षक तक छह नियमित कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ छह अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इससे पूर्व दो नियमित कर्मचारियों रोशन लाल व रोहित को निलंबित किया गया था, जबकि अनुबंधित कर्मचारी दीपक, इंदु व रीतु की सेवाएं पिछले माह समाप्त की जा चुकी हैं।
यह है मामला
यूएचएस में नकल के खेल मामले की एक विद्यार्थी ने शिकायत की थी। विजिलेंस के साथ यूएचएस को भी दस्तावेजों व वीडियो के साथ शिकायत दी गई थी। इसमें परीक्षा शाखा से उत्तर पुस्तिकाएं निकाल कर बाहर ले जाने व लिखी हुए उत्तर साफ कर दोबारा उत्तर लिखकर एमबीबीएस के फेल विद्यार्थियों को पास कराने की बात कही गई थी। इसके लिए औसतन पांच लाख रुपये प्रति विद्यार्थी प्रति पेपर वसूलने का भी आरोप लगाया गया था। इस मामले में एक माह पूर्व विवि प्रशासन जांच कमेटी गठित की थीए जिसकी रिपोर्ट आने पर विवि प्रशासन ने कार्रवाई की है।
विवि प्रशासन का पक्ष
स्वास्थ्य विज्ञान विवि के जनसंपर्क प्रभारी के मुताबिक, विवि प्रशासन ने लगाए गए सभी आरोपों को सही बताते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं।