आईआईएम की ओर से बेटियों के सम्मान में रविवार को कराई गई मैराथन में भगदड़ मच गई। इससे करीब 12 बच्चे गिरकर चोटिल हो गए। बिना तैयारियों के कराई इस मैराथन में न तो पीने के लिए पानी की व्यवस्था थी और न ही पर्याप्त मेडिकल सुविधा।
एमडीयू के स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट को भी इसकी जानकारी नहीं थी। बच्चों को चोट लगने के बाद अभिभावकों और आयोजकों में तू-तू, मैं-मैं भी हुई। मैराथन चार श्रेणियों में बांटी गई थी, लेकिन इस हिसाब से योजना भी नहीं बनाई गई थी। मैराथन की थीम ‘रन फॉर गर्ल्स चाइल्ड’ थी।
ऐसे मची भगदड़ : 9:30 बजे शुरू हुई यह मैराथन चार श्रेणियों में बांटी गई थी। पहले श्रेणी में 5 किमी पुरुष वर्ग की दौड़, दूसरी श्रेणी में 5 किमी की महिलाओं की दौड़, तीसरी में 3 किमी की बच्चों की दौड़ और बड़ों की 10 किमी की दौड़ होनी थी।
सुबह साढ़े नौ बजे महिला और पुरुष वर्ग की दौड़ होने के बाद एमडीयू के खेल मैदान से बच्चों की तीन किलोमीटर दौड़ शुरू हुई। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, इसमें बड़े भी शामिल हो गए। इस दौरान कई लोग इसके विपरीत दिशा से भी दौड़ते हुए और कई बाइक सवार भी सामने आ गए। इससे भगदड़ मच गई और कई बच्चे गिर कर चोटिल हो गए।
अभिभावकों से हुई बहस : बच्चों को चोट लगने के बाद कई अभिभावकों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने आयोजकों को जमकर खरी-खरी सुनाई। कुछ परिजनों और आयोजक आईआईएम विद्यार्थियों के बीच जमकर बहस भी हुई। घायल बच्चों को मरहम पट्टी भी एमडीयू के स्पोर्ट्स डायरेक्टर डॉ. डी.एस. ढुल के आने के बाद किया गया। डॉ. ढुल ने बाद में अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभाली।
लौट गए थे कई धावक : अव्यवस्थाओं की शुरुआत सुबह रजिस्ट्रेशन के समय से हो गई थी। आयोजकों ने एक समय के बाद रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए थे। जिन लोगों के रजिस्ट्रेशन हुए थे, उनमें से कई को टी-शर्ट ही नहीं दी गई। इससे नाराज होकर काफी लोग वापस लौट गए थे।
जब नहीं देख सके, तब मर्जी से की मदद : मैराथन कराने की मंजूरी आईआईएम प्रशासन ने एमडीयू प्रशासन से ले ली थी, लेकिन यवस्था के लिए मदद नहीं मांगी। एमडीयू के स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट को भी सूचना नहीं दी, जबकि मैराथन स्पोर्ट्स ग्राउंड से शुरू होना था। स्पोर्ट्स डायरेक्टर डॉ. डी.एस. ढुल ने कहा, यदि पहले सूचना दी गई होती तो एमडीयू के खिलाड़ी और शिक्षक व्यवस्थाएं बनाने में मदद करते। जब हमसे देखा नहीं गया तब अपनी मर्जी से ही मदद की।