जीएसटी चोरी का मामला बेहद सरल है। सीजीएसटी विभाग की जांच में सामने आया है कि रिटर्न भरते समय सेल कम दिखाई गई है। प्रतिष्ठानों की रोज की कमाई करीब दो लाख रुपये है, जबकि संचालक ने यह राशि काफी कम दर्शाई। इसीलिए बाकी कमाई बचा ली। इस टैक्स चोरी का स्पष्ट तौर पर आभास तक नहीं हुआ।
10 दिन से नजर रख रही थी टीम
सीजीएसटी की टीम ने टैक्स चोरी का खेल पकड़ने के लिए दस दिन तक प्रतिष्ठान पर नजर रखी। टीम के सदस्यों ने लगातार ग्राहकों को सर्विलांस पर रखा। उनके आने की संख्या के अलावा खरीद और बिक्री का रिकार्ड दर्ज किया। इस रिकार्ड के हिसाब से ही प्रतिष्ठानों पर दो लाख रुपये रोज की कमाई बताई गई है।
छापे की खबर से बाजार में मचा हड़कंप
शीला बाईपास स्थित मिठाई की दुकान पर जीएसटी के छापे से पूरे शहर में हड़कंप मच गया। इस प्रतिष्ठित दुकान पर हुई छापामार कार्रवाई की दिन भर चर्चा रही। इससे पूर्व विभाग शहर की एक बेकरी और एक चाट भंडार पर छापा मार चुका है। बेकरी से साढ़े नौ लाख रुपये व चाट भंडार से 19 लाख रुपये भरवाया गया था।
10 लाख जमा करा लिए हैं
श्रीकृष्णा मिष्ठान भंडार पर कम बिक्री दिखाकर जीएसटी चोरी का मामला संज्ञान में आया है। इसके चलते विभाग टीमों ने छापामार कार्रवाई की। पहली नजर में करीब 45 लाख रुपये जीएसटी चोरी का सामने आ रहा है। यह राशि कुल जोड़ के बाद कम या ज्यादा हो सकती है। फिलहाल 10 लाख रुपये जीएसटी शुल्क जमा करा लिया गया है। अनिल रावल, असिस्टेंट कमिश्नर, सीजीएसटी।