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36 घंटे में रोहतक डिपो की बसों ने लगाए 748 फेरे

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रोहतक। रक्षाबंधन पर बहनों के लिए 36 घंटे तक हरियाणा रोडवेज की बसों में सफल नि:शुल्क होने की वजह से रोहतक डिपो की बसों में करीब एक लाख यात्रियों ने सफर किया, जिनमें करीब 71 हजार बहनें रहीं। वीरवार को डिपो की 187 बसों ने लोकल रूटों पर 730 फेरे (चक्कर) लगाए।
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बताते चलें प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन के चलते 14 अगस्त की दोपहर 12 से 15 अगस्त की रात 12 बजे तक बहनों के लिए बस में सफल नि:शुल्क किया था। त्यौहार पर उमड़ने वाली अच्छीखासी भीड़ के मद्देनजर डिपो अधिकारियों ने बस स्टैंड पर समुचित इंतजाम किए। तीन कंट्रोल रूम बनाए और करीब 25 इंस्पेक्टरों की ड्यूटी भीड़ का आंकलन करके बसें चलवाने में लगाई गई। 14 अगस्त को रोहतक डिपो की बसों में करीब 35 हजार बहनों ने सफल किया वहीं पुरुषों की भी संख्या इतनी ही रही। जिसकी वजह से डिपो की औसतन आमदनी बराबर ही रही। रक्षाबंधन के चलते वीरवार की सुबह से ही बस स्टैंड पर बहनों की काफी भीड़ उमड़ने लगी। स्थिति यह रही कि जैसे ही बस वर्कशाप से बस स्टैंड पर आती वैसे ही सवारियों से ठसाठस भर जाती। दोपहर में भीड़ की वजह से हालात बेकाबू होने की स्थिति पैदा हो गई। इस पर महाप्रबंधक ने स्वयं बस स्टैंड पर पहुंचकर व्यवस्थाएं संभाली। महाप्रबंधक ने सबसे पहले देहात के रूट महम, कलानौर, सांपला आदि के लिए बसों को संचालित करवाया। इसके अलावा लोकल रूट दिल्ली, हिसार, पानीपत, झज्जर, सोनीपत, जींद व भिवानी के लिए एक के बाद एक बसें रवाना की जिससे काफी हद तक भीड़ कंट्रोल हुई। रोहतक डिपो के अनुसार 36 घंटे तक रोडवेज की बसों में बहनों का सफर नि:शुल्क होने की वजह से करीब 71 हजार बहनों ने सफर किया। डिपो की 187 बसों ने लोकल रूट पर 730 फेरे लगाए।
रोहतक डिपो महाप्रबंधक जोगेंद्रर सिंह का कहा है कि डिपो की बसों से करीब 71 हजार बहनों ने सफर किया। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ लोकल रूटों पर बस चलवाने पर पूरा फोकस रहा।
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प्राइवेट बसें कम चलने की वजह से हुई परेशानी
अधिकांश प्राइवेट बस संचालकों ने प्रदेश सरकार के फैसले को ठेंगा दिखाते हुए रक्षाबंधन पर बसों का संचालन नहीं करवाया। यही वजह रही कि बहनों को यात्रा परेशानी उठाकर करनी पड़ी। रोहतक डिपो के अनुसार रोहतक बस स्टैंड से करीब 70 प्राइवेट बसें संचालित होती है, जो औसतन तीन-चार चक्कर लगाती है। सामान्य दिनों में बस बूथ पर खड़ा होने को लेकर प्राइवेट बस संचालक काफी मशक्कत करती है। वहीं, वीरवार को बस स्टैंड से करीब 35 ही बसें संचालित हुई जिन्होंने दो से ज्यादा चक्कर नहीं लगाए। एडीसी अजय कुमार का कहना है कि पता लगाया जाएगा कि आखिर किस वजह से प्राइवेट बसें रक्षाबंधन पर कम चली।
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