एमबीबीएस में प्रवेश के लिए लागू की गई बॉन्ड पॉलिसी मामले में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। सरकार ने नई पॉलिसी जारी करते हुए अब विद्यार्थियों से 10 लाख रुपये प्रवेश के समय नहीं, बाद में लिए जाने का दावा किया है। यही नहीं, प्रदेश का इकलौता एडेड अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भी पॉलिसी के दायरे में आ गया है।
अब से यहां दो लाख रुपये में एमबीबीएस नहीं होगी। इसके लिए अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तरह 40 लाख रुपये ही लगेंगे। यह कहना है धरनारत एमबीबीएस विद्यार्थियों का। वे सरकार की ओर से जारी की गई नई बॉन्ड पॉलिसी को लेकर मंगलवार शाम मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
एमबीबीएस छात्र अक्षत मित्तल, गौरव, प्रिया कौशिक व उमंग ने कहा कि सरकार ने नई बॉन्ड पॉलिसी जारी की है। इसमें भी वही खेल है। नई पॉलिसी में बॉन्ड की राशि पहले की बजाय बाद में देने की बात कही गई है। पॉलिसी के तहत 40 लाख रुपये लिए जाएंगे। यह राशि कब ली जाएगी, यह भी स्पष्ट नहीं है।
पॉलिसी में केवल बाद में राशि लिए जाने का जिक्र है। ऐसे में सत्र शुरू होने के बाद या अगले सत्र में भी राशि ली जा सकती है। साथ ही सरकार ने इस पॉलिसी में भी बैंक की भूमिका स्पष्ट नहीं की है। बैंक को पॉलिसी में क्यों शामिल किया जा रहा है।
यह अस्पष्ट है। नौकरी सुनिश्चित करने पर भी कोई बात नहीं की गई है। नई पॉलिसी भी केवल छलावा है। विद्यार्थी बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में धरने पर बैठे हैं। यह धरना पॉलिसी रद्द होने तक जारी रहेगा। अब हम किसी भी तरह पीछे नहीं हटेंगे।
पीजीआई निदेशक ने की प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से बात
सरकार ने सात नवंबर को गजट नोटिफिकेशन जारी करते हुए बॉन्ड पॉलिसी में संशोधन किया है। इसके तहत पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने अपने कार्यालय में विद्यार्थियों के प्रतिनिधि दल के साथ बैठक की। इसमें डीन पीजीआईएमएस डॉ. कुलदीप सिंह लालड़, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. गजेंद्र, डिप्टी डीन डॉ. निशा मारवाह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर सिंह, पीआरओ डॉ. उमेश यादव व ग्रीवेंस कमेटी से डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. अपर्णा, डॉ. ज्योति कौशल, एडीए वरुण कुमार और प्रतिनिधि दल के सदस्य शामिल रहे। बैठक में नोटिफिकेशन के हर पहलू पर शांतिप्रिय ढंग से चर्चा की गई।
नए निर्देशों के तहत एमबीबीएस में प्रवेश के समय किसी भी बॉन्ड राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि चयनित होने पर हरियाणा सरकार में सेवा को विकल्प नहीं चुनते हैं तो यह बॉन्ड एमबीबीएस पाठ्यक्रम के अंत में लागू किया जाएगा।