रोहतक। काला पीलिया लिवर को ही प्रभावित नहीं करता है। यह दिल, दिमाग, त्वचा को भी प्रभावित करता है। यह एक तरह का मानसिक रोग है। कई लोग इस बीमारी को हल्के में लेते हैं। मरीज इलाज लेने व इस बारे में किसी को बताने से भी बचते हैं। ठीक होने के बावजूद मरीज अपना संदेह दूर करने के लिए काला पीलिया को दोबारा जांच कराने पीजीआई पहुंच रहे हैं। इसे मल्होत्रा सिंड्रोम नाम दिया गया है। पीजीआई के अध्ययन में सामने आया यह सच इंटरनेशनल जरनल्स ऑफ एडवांस्ड रिसर्च (आईजेआर) में प्रकाशित हो चुका है।
दरअसल, गेस्ट्रोइएंट्रोलॉस्टि विभाग में 12 साल पहले जीवन रेखा प्रोजेक्ट के तहत काला पीलिया का इलाज शुरू हुआ था। संस्थान के बाद अब काला पीलिया का प्रदेश भर में पूरी तरह निशुल्क इलाज किया जा रहा है।
यूपी, राजस्थान, पंजाब से भी मरीज यहां इलाज लेने आ रहे हैं। इन मरीजों पर संस्थान में हुए अध्ययन में काला पीलिया का लिवर के अलावा शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करने की बात सामने आई है।
छोटी-छोटी बीमारियों पर करा रहे जांच
काला पीलिया के मरीज व परिजन बीमारी ठीक होने के बाद डरे रहते हैं। यही वजह है कि छोटी-छोटी बीमारी होने पर वे काला पीलिया की जांच कराने संस्थान पहुंच रहे हैं। ऐसे यह मानसिक रोग बन गया है। इन मरीजों की इलाज के साथ काउंसिलिंग भी की जा रही है।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रो. डाॅ. वरुण अरोड़ा के सहयोग से पीजीआई लगभग आठ हजार हेल्थकेयर वर्कर्स को हेपेटाइटिस बी की निशुल्क तीन खुराक दे रहा है। इसके लिए 24 हजार खुराक पीजीआई को मिल चुकी हैं।
ओपीडी में 20 मरीज आ रहे रोज
पीजीआई की ओपीडी में काला पीलिया के 20 मरीज रोजाना आ रहे हैं। इसके अलावा, 60 मरीज पुराने होते हैं। ओपीडी में आने वाले 80 मरीजों में यूपी, दिल्ली, राजस्थान व पंजाब के भी मरीज शामिल हैं। अब तक 26 हजार हेपेटाइटिस सी व 12 हजार हेपेटाइटिस बी के मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इलाज के बाद ये सामान्य जीवन बिता रहे हैं।
गर्भस्थ शिशु को किया सुरक्षित
स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. डॉ. पुष्पा दहिया, प्रो. डाॅ. वाणी मल्होत्रा व नोडल ट्रीटमेंट सेंटर अधिकारी ने काला पीलिया से पीड़ित महिलाओं के गर्भस्थ शिशु को सुरक्षित बनाया है। संस्थान में अब तक 500 काला पीलिया पीड़ित गर्भवती में जरूरत अनुसार इलाज व नवजात को हेपेटाइटिस बी की इम्युनोग्लोबिन और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के लगाने से हेपेटाइटिस बी से पूर्ण सुरक्षित करने में सफलता प्राप्त की है।
इसी प्रकार 25-30 मरीज प्रतिमाह डायलिसिस के दौरान काला पीलिया की बीमारी से ग्रसित मिल रहे हैं। काला पीलिया मरीजों के परिवार में 13 प्रतिशत सदस्यों में यह बीमारी पाई जा रही है। काला पीलिया के वायरस के टेस्ट का दायित्व डॉ. परमजीत सिंह गिल, प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी निभा रहे हैं।
- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, नोडल अधिकारी, काला पीलिया नोडल ट्रीटमेंट सेंटर, पीजीआई।