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हुड्डा मेरे देवर, यहां केवल छोटूराम की जय बोलो: प्रेमलता नरवाना आऊं तो भी समर्थकों को समझा देना भाभी: हुड्डा

Sat, 13 Feb 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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दीनबंधु छोटूराम के जन्मोत्सव पर शुक्रवार को शहर की छोटूराम धर्मशाला में सियासी दिग्गज जुटे। यहां एक बार फिर पिछले साल की तरह ही पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी उचाना से विधायक प्रेमलता एक मंच पर दिखे। कार्यकर्ताओं ने जिंदाबाद के नारे लगाकर दोनों नेताओं को स्वागत किया तो चंद मिनट बाद ही दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं में होड़ मच गई।
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समर्थक पूर्व सीएम हुड्डा के जयकारे लगा रहे थे तो कैबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह के समर्थक ढोल नगाड़ों के साथ पहुंच गए। दोनों में जब जयकारों की होड़ मच गई तो मंच से वक्ताओं को बोलना पड़ा। विधायक प्रेमलता ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके देवर हैं। यह सामाजिक कार्यक्रम है।

यहां कोई दंगल नहीं हो रहा है। सभी छोटूराम के कार्यक्रम में आए हैं। नारे लगाने हैं तो चुनाव में लगाना। अभी केवल छोटू राम अमर रहे के नारे लगाओ। राज्यपाल डॉ. देवव्रत देरी होने के कारण बिना खाना खाए कार्यक्रम में आए हैं, इसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगी। वहीं पूर्व सीएम हुड्डा ने अपनी भाभी प्रेमलता को सटीक जवाब देते हुए कहा कि वे जब नरवाना में आएं तो नारे लगाने वालों समर्थकों को वहां भी ऐसे ही समझा देना।
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कृष्ण की तरह कूटनीतिज्ञ थे छोटूराम:  डॉ. देवव्रत
दीनबंधु के 135वें जन्मदिवस समारोह में पहुंचे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत ने कहा कि समाज छोटूराम के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। वे कृष्ण की तरह कूटनीतिज्ञ, विवेकवान और दूरदर्शी थे। सामान्य पुरुष और महापुरुष में अंतर होता है। सामान्य व्यक्ति सामान्य काम करता है और महापुरुष अपने विचार व कर्मों से धरती पर अनेकों उदाहरण छोड़ जाता है।

 छोटूराम ने गरीब परिवार में जन्म लेकर वकालत शुरू की। लेकिन किसान की संपत्ति की कुर्की के मामले के बाद वकालत छोड़कर किसानों के हित के लिए राजनीति को अपनाया। राजनीति में भी उन्होंने कूटनीति से काम लिया। वे चाहते तो अंग्रेजों से लड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने समझदारी और दूरदर्शिता से काम लेकर देश के किसानों के हित में अंग्रेजों के काले कानूनों को बदलवाया।

आज हमारे युवाओं में संस्कारों की कमी आ रही है। युवा बड़ी तेजी से नशे की लत मेें पड़ रहे हैं। यह नशा आतंकवाद से भी खतरनाक है। हमारी संस्कृति लुप्त होती जा रही है। हमारे देश में पितृ भव, मातृ भव सदियों से चला आ रहा है, लेकिन आज पारिवारिक स्थिति में नकारात्मक बदलाव आए हैं।

आज मां को अलग और पिता को अलग रहना पड़ रहा है। गाय घरों में नहीं गौशालाओं में हैं, यह हमारे देश की संस्कृति नहीं है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कृति के गुण भी दें, यही छोटूराम को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

किसान की आवाज थे छोटू राम : हुड्डा
समारोह के अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि छोटूराम किसानों की आवाज थे। हरियाणा व पंजाब पूरे देश का पेट भरते हैं। इसके लिए उन्होंने भाखड़ा बांध के प्रस्ताव को पास कराया। इससे मिलने वाला पानी अहम है। छोटू राम ने यह प्रस्ताव अपने अंतिम समय में पास कराया, उस समय उनके पिता रणबीर सिंह हुड्डा सिंचाई मंत्री थे। हर मेहनत करने वाला व्यक्ति छोटूराम का अपना था। उन्होंने भी कभी जाति पाति की बात नहीं की। ऊंचे पदों पर तो बहुत लोग पहुंच जाते हैं, लेकिन वे लोग कम ही होते हैं, जिनको समाज याद रखता है।

किसान की हालत होती खराब : प्रेमलता    
उचाना की विधायक प्रेमलता ने कहा कि यदि छोटू राम नहीं होते तो आज किसान की हालत बहुत खराब होती। उनकी मौजूदगी में देश का नक्शा कुछ ओर ही होता। उन्होंने आत्म सम्मान के लिए उत्तर प्रदेश के राजा की नौकरी तक ठुकरा दी थी। बीमारी की हालत में भी उन्होंने नवंबर 1944 में किसानों को संबोधित किया।

ये रहे उपस्थित
विधानसभा के पूर्व उप स्पीकर मनफूल सिंह, कैप्टन चतर सिंह, एसडीएम दलबीर सिंह फौगाट, चांद सिंह फौगाट, जगजीत सिंह मलिक, शास्त्री प्रकाशवीर, सुधीर फौगाट और अमित काजल।
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