रोहतक में पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा।
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है हरियाणा आर्थिक संकट की ओर जा रहा है। विकास का कोई काम नहीं हो रहा है। सरकार कर्जे पर कर्जा ले रही है। प्रदेश पर साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का कर्जा थोप दिया गया है।वह सोमवार को सोनीपत रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पूर्व सीएम ने कहा कि इनेलो अपनी खोई हुई राजनीतिक धरती तलाश रही है। यह अधिकार सभी को है। इनेलो अभय चौटाला के दिल्ली में शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व से मिलने के सवाल पर पूर्व सीएम ने कहा कि कोई भी किसी से मिल सकता है। वह इंडिया गठबंधन में शामिल होंगे तो पता लग जाएगा। इनेलो के इंडिया गठबंधन में शामिल होने को लेकर न तो किसी का विरोध किया है न समर्थन।
इस बारे में किसी ने कुछ नहीं पूछा है। जबकि कोई पूूछेगा तो जवाब दे दिया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान की पीएम व सीएम पर की गई टिप्पणी पर वे तटस्थ नजर आए। उन्होंने यह कह कर किनारा किया, कि इसका जवाब वे दे चुके हैं।
नूंह प्रकरण की जांच हो
हुड्डा ने कहा कि सरकार किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं है। नूहं में कई जाने गईं। सिपाही मरे, दो होम गार्डों की भी जान गई। सीएम ने बयान दिया कि सोची समझी साजिश है। साजिश किसने और क्यों की इसका खुलासा होना चाहिए। जनता जानना चाहती है। क्या साजिश में खुद सरकार शामिल है। ऐसा नहीं है तो क्यों सरकार जांच के लिए तैयार नहीं है।
आरोपी मंत्री का इस्तीफा लें सीएम
उन्होंने कहा कि महिला कोच को चार्जशीट करना गलत है। आरोपी मंत्री संदीप सिंह को खुद इस्तीफा दे देना चाहिए था। सीएम को भी इन गंभीर आरोपों में खुद इस्तीफा ले लेना चाहिए। प्रदेश में नशे की रोकथाम जरूरी है। कांग्रेसशासन काल में खेल नीति के तहत हर गांव में स्टेडियम बनाए थे। अब इनकी सुध नहीं ली जा रही। लखीमपुर खीरी में दो साल पहले हुए मामले में जांच होनी चाहिए। प्रदेश का माहौल ठीक नहीं है। इसलिए निवेश नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में हरियाणा सबसे असुरक्षित प्रदेश है। खनन घोटाला, शराब घोटाला, चावल खरीद घोटाला दुनिया भर में घोटाले इस सरकार में हुए हैं। इनकी जांच होनी चाहिए।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल किसी काम का नहीं
उन्होंने कहा कि परमल धान की सोमवार से सरकारी खरीद शुरू हुई है। धान उत्पादक अपनी 80 प्रतिशत फसल बेच चुके हैं। उन्हें प्रति क्विंटल करीब 300 रुपये का नुकसान हुआ है। बाजरे में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ है। एमएसपी भी नहीं मिला है। इस पर भी ये दावे 52 फसलों में एमएसपी के कर रहे हैं। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल किसी काम का नहीं। किसान अपनी फसल मंडी में नहीं ले जा सकता है। करनाल मंडी में तो हड़ताल करनी पड़ी है।