केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि हुड्डा उनके लिए सीएलयू कराने की बात कहते हैं तो इस बार उन पर मानहानि का मुकदमा करा देंगे। मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी कोई सीएलयू नहीं कराया। हुड्डा किस-किस को कैसे आकर्षित करते रहे हैं, इस बारे में अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन मैं आकर्षित होने वालों में नहीं हूं। उन्होंने कहा कि हुड्डा पर अभी तक तीन केस दर्ज हुए हैं। सभी केसों में उनके खिलाफ सरकार के पास पुख्ता सबूत हैं।
मंगलवार को कैनाल रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने भाजपा की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिये। उन्होंने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर है। सलाह दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। उनको संगठन की ओर से भाजपा की मजबूती की जिम्मेदारी मिलती है तो वह उसे निभाएंगे। जिम्मेदारी नहीं भी मिलती है, तब भी पार्टी के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि 50 साल तक प्रदेश में संकुचित सोच वाली राजनीतिक पार्टियाें ने शासन किया। प्रदेश में नेता राजनीतिक मूल्यों, परिपक्वता और अच्छे राजनीतिक दृष्टिकोण से नीचे आ गए। उन्होंने कहा कि अगले 50 सालों के लिए हरियाणा में राजनीतिक रोडमैप तैयार करने की जरूरत है, जिसमें गुणात्मक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, लोक संस्कृति और अच्छे नेताओं को लाना होगा। उन्होंने कहा कि लगभग 44 साल से वह राजनीति में हैं, लेकिन पहली बार देखा कि देश में जनता के हित की योजनाएं बनी हैं। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अजय बंसल, पूर्व विधायक ओमप्रकाश बेरी, मंत्री के ओएसडी सुधीर फौगाट, धर्मबीर शर्मा, गायत्री आर्य आदि मौजूद रहे।
जीएसटी काउंसिल के गठन को कैबिनेट से मंजूरी मिली
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जीएसटी बिल पर पिछले आठ सालों से काम हो रहा था। भाजपा सरकार में जीएसटी पर तेजी से काम हुआ। देश के 16 राज्यों ने विधानसभा में इसे पास कर दिया है। केेंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटी काउंसिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल से देश में होने वाली आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी और काले धन पर अंकुश लगेगा।
चिदंबरम से कहा था, पॉजिटिव रिपोर्ट पर दिया जाए आरक्षण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब जाटों को आरक्षण दिया गया था तो उस समय केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम से मिले थे। उनसे कहा था कि बैकवर्ड कमीशन की रिपोर्ट पॉजिटिव होनी चाहिए और उसके आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। उस समय कहा गया कि कमीशन की रिपोर्ट कैसी भी रहे, हम उसे नजरअंदाज करके आरक्षण दे देंगे। इसी कारण आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में कैंसिल कर दिया गया। जबकि प्रदेश का आरक्षण हाईकोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि कृषि कार्य करने वाले गुर्जर, यादव व जाट वर्ग की सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एक समान है। इस आधार पर गुर्जर व यादव की तरह जाट को भी आरक्षण मिलना चाहिए।