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पुराने रोहतक के 25 सिपाहियों की सूची रोहतक के डीसी ऑफिस भेजी, 75 की पहचान के लिए बेल्ट नंबर की दरकार

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रोहतक। आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों को पहचान दिलाने की रेवाड़ी के श्रीभगवान फौगाट ने ठानी है। इसके लिए उन्होंने पिछले साल डीसी रेवाड़ी के माध्यम से डीसी रोहतक को पुराने रोहतक के 25 सिपाहियों की सूची भेजी, जो आजाद हिंद फौज में रहते शहीद हो गए या जिंदा घर लौटे। इसका रिकार्ड दिल्ली स्थित सांस्कृतिक मंत्रालय से मिला है। फौगाट का दावा है कि पुराने रोहतक के करीब 100 सिपाहियों का रिकार्ड उनके पास है। केवल परिजनों द्वारा सिपाही का ब्रिटिश आर्मी द्वारा भर्ती के समय दिया गया बेल्ट नंबर व आर्मी नंबर बताना होगा।
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श्रीभगवान ने बताया कि उसके पिता रामसिंह 1941 में ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए और अंग्रेजों की तरफ से जापान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया। जापान ने सिपाहियों को बंधक बनाकर जेलों में बंद कर दिया। बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रयास से जापान ने भारतीय सैनिकों को रिहा कर दिया। रिहा हुए सैनिक आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। आजाद की लड़ाई में कई शहीद हो गए, हालांकि काफी सैनिक देश की आजादी के साथ घर लौट आए। इसके बावजूद आजाद हिंद फौज के सैकड़ों सैनिक ऐसे हैं, जिनका अंग्रेजों ने पूरा रिकार्ड नहीं दिया। इस कारण ऐसे शहीदों को आज तक पहचान नहीं मिल सकी है। सांस्कृतिक मंत्रालय पत्र से अब आजाद हिंद फौज में शामिल रहे सिपाहियों का ब्योरा मिला है। आरटीआई से निकलवाई जानकारी के बाद उसने डीसी रेवाड़ी को अगस्त माह में मांग पत्र देकर ऐसे सिपाहियों को पहचान दिलाने की मांग की। डीसी रेवाड़ी ने 29 अगस्त 2018 को डीसी चरखी दादरी, हिसार, अंबाला, झज्जर, रोहतक, सोनीपत, करनाल, जींद व कैथल को पत्र लिखकर ऐसे सिपाहियों की सूची भेजी थी। श्रीभगवान फौगाट का कहना है कि अब तक गुमनाम सिपाहियों को पहचान नहीं मिल सकी है। इसलिए डेढ़ साल से वे लड़ाई लड़ रहे हैं।
पिता को पहचान मिली तो राजकीय सम्मान से हुआ मां का अंतिम संस्कार
श्रीभगवान ने बताया कि उसके पिता रामसिंह का 1996 में देहांत हो गया था। उनको पहचान दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। सरकार ने उनके पिता को आजाद हिंद फौज का सिपाही माना। इसके बाद न केवल मां की पेंशन शुरू हुई, बल्कि 2012 में जब मां का देहांत हुआ तो उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वे चाहते हैं कि बाकी शहीदों व गुमनाम आजाद हिंद फौज के सिपाहियों व उनके परिजनों को भी यहीं सम्मान मिलना चाहिए।
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पुराने रोहतक की यह सूची भेजी थी रोहतक डीसी ऑफिस
रोहतक से सिपाही
सिपाही का नाम गांव
कालूराम सैमाण
मुंशीराम सैमाण
मातूराम कटेसरा
मोहम्मद यासिन कहानौर
मोहम्मद इलियास बैंसी
नानकराम सुनारिया
सुल्तान सिंह बहुअकबरपुर
गोकल राम बहुअकबरपुर
मांगेराम कटेसरा
कंवल सिंह पिलाना
शीशराम सुंडाना
लाल खान चांदी
अब्दुल रजाक बैंसी
जुम्मा खान रिटौली
घुपल राम भाली
रामस्वरूप निंदाना
गोरधन मकड़ौली
झज्जर की सूची
श्रीचंद झाड़ली
गोधाराम छारा
कांशी राम छारा
सोनीपत की सूची
छतर सिंह नूना माजरा सोनीपत
मक्खन सिंह जांटी
प्रेम सिंह खेड़ी खुमार
नोट : यह सूची श्रीभगवान फौगाट द्वारा उपलब्ध कराई गई है। उनका दावा है कि यह रिकॉर्ड उन्होंने आरटीआई एक्ट के तहत राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय के राष्ट्रीय अभिलेखागार से मिली है।
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