इंद्रवेश विद्यापीठ, टिटौली में शुक्रवार को आर्य समाज के अगले 50 वर्षों की रूपरेखा तैयार करने के लिए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विद्वत सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। महासम्मेलन में आर्य समाज के अनेक विद्वानों, विचारकों एवं प्रचारकों ने भाग लिया। सम्मेलन के पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर बाबा रामदेव शामिल हुए। उन्होंने पहले दिन दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
बाबा रामदेव ने लोगों को संबोधित किया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज और ऋषि दयानंद के अनुयायियों का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने गुरु विरजानंद, स्वामी श्रद्धानंद, लाला लाजपत राय, चाचा अजीत सिंह, शहीद भगत सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों को स्मरण किया और कहा कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से हजारों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। आज हम उन्हीं के बलिदानों के कारण स्वतंत्रता की हवा में सांस ले रहे हैं।
स्वामी आर्यवेश ने अपने संबोधन में कहा कि यह महासम्मेलन आर्य समाज की दशा और दिशा में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। सम्मेलन के माध्यम से आर्य समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाने एवं समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी तीन दिन तक देश-विदेश से आए विद्वान आर्य समाज के अगले 50 वर्षों की रूपरेखा तैयार करेंगे।
वरिष्ठ आर्य संन्यासी स्वामी प्रणवानंद ने कहा कि स्वामी दयानंद के विचारों को अपनाने की आवश्यकता है। पूर्व सांसद स्वामी सुमेधानंद ने कहा की महर्षि दयानंद का जीवन ओर उनके कार्य ही समाज को प्रेरणा देने वाले हैं।