रोहतक। हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (हिपा) की ओर से आयोजित गधे की बरात नाटक का जीवंत मंचन किया गया। हास्य व्यंग्य से भरपूर नाटक ने सभागार में समा बांध दिया। दर्शकों तक संदेश देने में नाटक पूरी तरह से कामयाब रहा।
कुरुक्षेत्र स्थित हरियाणा कला परिषद से प्रायोजित हरियाणा इंस्टीट्यूट आफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के सह सहयोग से जेड ग्लोबल स्कूल के सभागार में नाट्य उत्सव का शुभारंभ हुआ। जेड ग्लोबल स्कूल की प्राचार्य डॉ. प्रीति समारोह की मुख्य अतिथि रही जबकि सुनीत धवन ने उत्सव की अध्यक्षता की।
मंच संचालन आद्या वाधवा ने किया। पहले दिन सप्तक कल्चरल सोसाइटी के कलाकारों ने नाटक गधे की बारात का मंचन किया गया। यह गधे की बारात का 348वां मंचन था जिसका निर्देशन विश्वदीपक त्रिखा ने किया है। हरियाणा के प्रसिद्ध नगाड़ा वादक सुभाष नगाड़ा के संगीत से सजी प्रस्तुति में विकास रोहिला और गुलाब सिंह ने हारमोनियम के साथ-साथ गायकी के रंग बिखेरे।
सप्तक के अध्यक्ष अविनाश सैनी ने बताया कि सप्तक की ओर से अभी तक गधे की बरात नाटक का भारत के विभिन्न शहरों के अलावा पाकिस्तान के लाहौर में भी मंचन किया जा चुका है। हरिभाई बड़गांवकर के मराठी में लिखे इस नाटक का हिंदी रूपांतरण राजेंद्र मेहरा और रमेश राज हंस ने किया।
यह रही कलाकारों की भूमिका
हरियाणा कला परिषद के इस नाटक में कल्लू कुमार की भूमिका अविनाश सैनी ने, बृहस्पति गुरु, चौपट राजा की भूमिका डॉ. सुरेंद्र शर्मा, दीवान की भूमिका तरुण पुष्प त्रिखा, शक्ति सरोवर त्रिखा ने इंद्र, अनिल शर्मा ने चित्रसेन, चेरी गिरधर ने गंगी, महक कथूरिया ने राजकुमारी, प्रतिष्ठा और वर्षा ने अप्सरा रंभा और राजनर्तकी, कुमार गर्व ने द्वारपाल और नीतिका सिंगल ने बुआ की भूमिका निभाई।