सात दिन पहले लाल चौक मस्जिद के पास एक होटल में ठहरने का इंतजाम किया था। डिनर करने के बाद अगले दिन घूमने का प्लान बनाकर हम सब सो गए थे। सुबह आंख खुली तो देखा कि होटल के चारों तरफ करीब पानी ही पानी है। भाई-बहन, बहनोई और बच्चों के साथ तुरंत होटल बदलने के लिए बाहर निकले तो लाल चौक से नीचे का मंजर कुछ और ही था। 20-20 फुट तक पानी भरा हुआ था।
बस, सभी को वहां से किसी तरह से निकालकर मस्जिद के पास ही एक ऊंचे होटल में जाकर ठहर गए। वहां से देखा तो पानी बढ़ ही रहा था लग रहा था सब कुछ डूब जाएगा। खैर आप लोग चिंता मत करिए, अब हम सुरक्षित है...। जैसे ही पानी का बहाव कम होगा, हम वापसी करेंगे। आप चिंता न करें और अपना ख्याल रखें। ये कहना था श्रीनगर में फंसे आईडीसी के उप प्रधान सुरेश मित्तल के भतीजे मनीष मित्तल का।
जन्नत जैसी घाटी को देखने गए शहर के 31 लोग वहां पर आए सैलाब में बुरी तरह से फंस चुके हैं। कुदरत के इस कहर ने जहां एक ओर उन 31 की जान सकते में डाल दी है वहीं शहर में परिवार के लोग हर पल सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। 7 दिन से शहर के 15 लोगों के अलावा 16 लोग और फंसे हुए है। इन 16 लोगों में 8 मासूम हैं। शास्त्री नगर व माल गोदाम रोड समीप दो परिवाराें के कुल 31 लोगों पर कुदरत का कहर बना हुआ है।
हालांकि, बुधवार को सुभाष चंद गोयल व सुरेश मित्तल परिवार के सदस्यों ने अपने परिजनों को कैसे भी कर ई-मेल व मोबाइल फोन द्वारा खुद के सुरक्षित होने की सूचना दे दी है। दोनों परिवारों के सदस्यों ने तीन दिन बाद घर लौटने की उम्मीद जताई है। वहीं, इन परिवार के लोगों को जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किये जाने से भी नाराजगी है।
7 दिन पहले फ्लाइट से हुए रवाना - पेशे से बिजनेसमैन प्रेम मित्तल की उंगलियां मोबाइल फोन पर नंबर मिलाने से रुक ही नहीं रही है। चार दिन से अपने इकलौते बेटे मनीष मित्तल, दो बेटियों श्रुति व मेघा के साथ दामाद और उनके बच्चों से किसी तरह कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
प्रेम मित्तल का बेटा मैनुफैक्च्युरिंग व बड़ा दामाद मोबाइल पार्ट्स का बिजनेस करता है और छोटा दामाद सर्राफा व्यापारी है। मित्तल ने बताया कि 7 दिन पहले उनका पूरा परिवार श्रीनगर घूमने के लिए दिल्ली में फ्लाइट से रवाना हुए थे। 4 सितंबर को पहुंचे ही थे कि बाढ़ के कारण हालात बिगड़ने की वजह से 5 सितंबर को ही चाराें तरफ से रास्ते बंद हो गए।
दो दिन में हालात इतने खराब हो गए कि उनसे संपर्क होना भी मुश्किल हो गया। लाल चौक समीप जिस होटल में ठहरे, वहां पानी भर गया। बस फोन पर बातचीत हुई तो होटल बदलने की बात कहते ही बंद हो गया। चार दिन हो गए अब तक बात नहीं हुई है।
बुधवार को होनी थी वापसी - सुरेश मित्तल ने बताया कि बुधवार को उनके भतीजे और दो भतीजी ने श्रीनगर से वापसी करनी थी, लेकिन श्रीनगर में हालात नियंत्रण से बाहर होने के चलते उन्होंने आना रद्द किया। अपने बच्चों से लगातार बात करने की कोशिश कर रहे है, पर मिल ही नहीं पा रहा है। करीब दोपहर 1:30 बजे उनकी भाभी सूचना देती है कि बेटी मेघा के ससुराल से फोन आया है कि बच्चे सुरक्षित है। जैसे ही पानी का बहाव कम होगा, वह आने की वापसी करेंगे।
प्रकृति के कहर में 8 मासूम भी फंसे - प्रकृति के इस कहर में सुरेश मित्तल के भाई प्रेम मित्तल का इकलौता बेटा मनीष मित्तल (38), बहू अंबिका (30), पोती सुनीधी (11), पोती स्वीटी (8) व पोता सुशांक (5) के साथ दिल्ली में ब्याही बड़ी बेटी श्रुति गर्ग (32), दामाद अशोक गर्ग (34), दो नाती अर्चित (7) व नोनू (5) फंसे हुए है। साथ ही भिवानी में ब्याही छोटी बेटी मेघा (26), मनीष एरन (28), नाती रोहन (3) और उसका एक दोस्त, इसकी पत्नी व 2 बच्चे भी है।