फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak: चमेली अभी जिंदा है... दुलीचंद के बाद अब 85 वर्षीय महिला को मृत दिखा कर काटी पेंशन

Sun, 11 Sep 2022 08:55 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

वृद्धा के परिवार में कोई नहीं है। 12 साल पहले पति की मौत हो चुकी है। आप के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने धामड़ पहुंचकर वृद्धा से मुलाकात कर पेंशन की स्थिति जानी। 
विज्ञापन
महिला से पेंशन काटने की जानकारी लेते नवीन जयहिंद। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा के रोहतक में गांधरा के 102 वर्षीय दुलीचंद की अनूठी बरात के बाद मृत दिखा पेंशन काटने के विरोध में पेंशनधारकों ने अपनी आवाज को जोर शोर से उठाना शुरू कर दिया है। प्रशासन की लापरवाही के चलते अब 85 वर्षीय चमेली को मृत बता पेंशन काटने का मामला सामने आया है। जबकि चमेली अभी जिंदा है...। रविवार को आप के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने धामड़ पहुंच कर वृद्धा से मुलाकात कर पेंशन की स्थिति जानी। 

विज्ञापन


नवीन जयहिंद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में उम्र दराज बुजुर्ग कम ही बचे हैं। इन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहिए। बुजुर्ग महिला चमेली ने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, परिवार पहचान पत्र व बैंक स्टेटमेंट दिखाते हुए पेंशन कटने की जानकारी दी। उन्हें अंतिम पेंशन अप्रैल में मिली थी। प्रदेश भर में अनेक ऐसे मामले हैं। सरकार इनका निपटान नहीं कर रही है।

वृद्धा के परिवार में उसके अलावा कोई नहीं है, वह अकेली है। महिला के पति की 12 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। महिला 10 से 12 बार पेंशन बनवाने के लिए विभाग के चक्कर लगा चुकी है। ऐसे लोग सीएम विंडों पर भी शिकायत लगा रहे हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा है। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें : Haryana: 'फूफा' के बाद अब... 'थारी बेबे जिंदा है', दिव्यांग महिला को मृत दिखा काटी पेंशन, किया अनोखा विरोध

नवीन जयहिंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि बुढ़ापा पेंशन और फैमिली आईडी के नाम पर हरियाणा में घोटाला हो रहा है। कभी किसी का नाम गलत करते हैं, तो कभी किसी को फैमिली आईडी में मार दिया जाता है। धामड़ गांव से ही दिव्यांग शकीला दो साल से पेंशन बनवाने के लिए भटक रही हैं।
विज्ञापन


वह कभी डीसी कार्यालय तो कभी एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट कर हार चुकी हैं, मगर उनकी पेंशन नहीं बनी है। इसी गांव के 64 वर्षीय आजाद भी दो साल से अपनी पेंशन के लिए डीसी कार्यालय व एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे और भी मामले हैं। सरकार व प्रशासन को इन मामलों को प्राथमिकता से निपटाना चाहिए।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें