एमडीयू में विद्यार्थियों की गोपनीयता भंग करने का मामला सामने आते ही एमडीयू प्रशासन सतर्क हो गया है।
एमडीयू प्रशासन अब मामले को लेकर गुपचुप तरीके से जांच-पड़ताल में जुट गया है कि आखिर चूक किस स्तर पर हुई है।
एमडीयू से संबद्ध कॉलेजों में फिलहाल बीए, एमए और बीबीए समेत कई यूजी कोर्सों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन चल रहा है।
कॉलेजों में भेजी गई उत्तर पुस्तिकाओं में विद्यार्थी के रोल नंबर से लेकर नाम और उनके पिता के नाम तक की जानकारी भी शीट के साथ भेज दी गई।
अमर उजाला ने इस मामले को सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। हालांकि एमडीयू प्रशासन पहले यह मानने को तैयार ही नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है, लेकिन खबर छपने के बाद वह इसे गोपनीयता में चूक मान रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एमडीयू प्रशासन अब इस मामले को लेकर गुपचुप तरीके से जांच-पड़ताल में जुट गया है कि आखिरी यह चूक किस स्तर पर हुई है। संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसके लिए दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।
यह था मामला
कॉलेजों में मूल्यांकन के लिए भेजी गई उत्तर पुस्तिकाओं में पार्ट ‘सी’ भी भेजा गया है, जिसमें विद्यार्थियों की पूरी जानकारी है, जबकि यह पार्ट यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा में जमा होना चाहिए था। ऐसे में कोई भी विद्यार्थी मूल्यांकन कर रहे शिक्षक के संपर्क में आकर फायदा उठा सकता है, जिससे होनहार विद्यार्थियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
कुछ ऐसा बोले कुलपति
इस संबंध में जब कार्यवाहक कुलपति सुधीर राजपाल से बात की गई तो पहले तो उन्होंने मना कर दिया कि ऐसा नहीं हो सकता। हालांकि बाद में उन्होंने भी माना कि गोपनीयता भंग नहीं होनी चाहिए। यह गलत है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से पूछा जाएगा।