संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। बावल क्षेत्र में एक एंबुलेंस चालक मरीज को सरकारी की जगह निजी अस्पताल में ले गया। निजी अस्पताल में मरीज को जिंदा बताकर भर्ती किया गाय और 10 हजार रुपये वसूले गए। बाद में उसे रेफर कर दिया गया। जब परिजन मरीज को सरकारी अस्पताल में लेकर पहुंचे तो मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। इसकी शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मूल निवासी राजकुमार ने बताया कि यूपी के सिमरिया निवासी उसके जीजा राजेश कुमार (32) कनुका गांव में परिवार के साथ रह कर मजदूरी करते थे। जीजा को शाम पेट में दर्द हुआ था। परिजन उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले गए थे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के कहा गया था। राजेश को सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई।
राजकुमार ने बताया कि एंबुलेंस चालक सरकारी अस्पताल की जगह प्राइवेट अस्पताल में ले गया जहां राजेश को भर्ती कर लिया गया। कुछ समय बाद अस्पताल संचालक ने बताया कि मरीज की हालत नाजुक है। उसे दूसरे अस्पताल में ले जाओ। 10 हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा तो परिजनों ने देने में असमर्थता जाहिर की।
राजकुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल संचालक अपनी जिद पर अड़ा रहा। उसने किसी तरह पैसे का इंतजाम किया। पैसे जमा कराने के बाद जब राजेश को सरकारी अस्पताल बावल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने बताया कि उसकी काफी समय पहले मौत हो चुकी है।
राजेश के परिवार में उसकी पत्नी के साथ-साथ पांच बच्चे भी हैं। इनमें चार लड़कियां हैं। जांच अधिकारी सुनील रंगा का कहना है कि शिकायत पर अभी जांच की जा रही है, जांच पूरी होने के बाद आगामी कार्रवाई होगी।