ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों ने मांगों को लेकर लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से कृषि उपज के थोक व खुदरा व्यापार को सरकार द्वारा अपने नियंत्रण में लेने, सरकारी दुकान खोलकर राशन समेत सभी जरूरी चीजों को सस्ते दामों पर देश के तमाम ग्रामीण और शहरी गरीबों को मुहैया कराने, फसलों को लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने की गारंटी का कानून बनाने, ग्रामीण गरीबों को साल भर काम और पर्याप्त मजदूरी देने, किसानों और भूमिहीन ग्रामीण गरीबों को कर्ज मुक्त करने, 60 वर्ष उम्र होने पर 10000 रुपये प्रति महीना पेंशन देने की मांग की।
बिजली बिल संशोधन 2023 व स्मार्ट/प्रीपेड मीटर स्कीम को तुरंत रद्द करने, खाद-बीज-कीटनाशी तथा कृषि औजारों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराकर खेती में लागत कम करने, भावांतर भरपाई योजना रद्द करने, प्राकृतिक आपदाओं से बर्बाद हुई फसलों का 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने और पराली जलाने को लेकर किसानों पर दर्ज मुकदमे रद्द करने तथा पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता देने की। संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी ने कहा कि 13 महीने चले किसान आंदोलन के स्थगन के अवसर पर मोदी सरकार ने कहा था कि बिजली संशोधन बिल को किसानों और अन्य संबंधित पक्षों की अनुमति के बिना लागू नहीं किया जाएगा। एमएसपी गारंटी कानून के लिए एक कमेटी बना दी जाएगी और किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे।
पराली प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे, परंतु सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए। इसलिए इस ज्ञापन के माध्यम से आग्रह करते हैं कि वे हमारी मांगों को पूरा करें, अन्यथा किसानों तथा खेत मजदूरों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इस अवसर पर जगबीर सिंह, रामकिशन, दयानंद, ओमवीर सिंह, सतपाल सभरवाल, संसार सुरहेती, किशन छबीली मौजूद थे।