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वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज में पहुंची एआईसीटीई की टीम

Wed, 30 Mar 2016 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
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वैश्य संस्‍था में निरीक्षण करती टीम। - फोटो : amar ujala
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विवादों से घिरे वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन के लिए मंगलवार का दिन तनाव भरा रहा। पिछले दिनों हुए विवाद और अव्यवस्था के माहौल के बीच कॉलेज पहुंची एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) की टीम के निरीक्षण ने प्रबंधन के पसीने छुड़ाए रखे। कॉलेज की मान्यता बचाने को लेकर जहां प्रबंधन ने हर दाव-पेच आजमाया तो वहीं एआईसीटीई की टीम ने भी कॉलेज की हर गतिविधियों का बारीकी से निरीक्षण किया।
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दरअसल, वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज पिछले दिनों खूब सुर्खियों में रहा। कॉलेज में भारी संख्या में स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया गया तो काम कर रहे स्टाफ को लंबे समय से तनख्वाह नहीं दी गई। ऐसे विवादों के बीच मंगलवार सुबह 10 बजे एआईसीटीई की तीन सदस्य टीम कॉलेज पहुंची। टीम ने सबसे पहले कंप्यूटर लैब और क्लास रूम का निरीक्षण किया। कॉलेज में कितनी जगह है, कितने क्लास रूम, कितना इंफ्रास्ट्रक्चर और कितना स्टाफ।

टीम ने फैकल्टी की भी बैठक ली। टीम ने फैकल्टी से योग्यता पूछी और कॉलेज से संबंधित अन्य जानकारी जुटाई। आखिर में छात्रों से भी बातचीत की गई। देर शाम तक चले निरीक्षण के दौरान टीम ने गोपनीय रिपोर्ट तैयार की। टीम के जाने के बाद ही कॉलेज प्रबंधन ने राहत की सांस ली। प्रबंधन को डर सता रहा है कि टीम क्या रिपोर्ट देगी। क्योंकि पिछले दिनों कॉलेज में काफी विवाद हुए, जिनसे अगले सत्र की मान्यता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। 
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वीटीआई में कंप्यूटर कम 
एआईसीटीई की दूसरी टीम ने वीटीआई (वैश्य टेक्निकल इंस्टीट्यूट) में भी निरीक्षण किया। यहां पर भी कंप्यूटर लैब समेत इंस्टीट्यूट का बारीकी से निरीक्षण किया। फैकल्टी और छात्रों से भी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान लैब में कंप्यूटर की संख्या मानकों के अनुसार कम मिली, जिस पर टीम ने कड़ी आपत्ति जताई। टीम ने बाकी सुविधाओं को संतोषजनक बताया और निर्देश दिए कि कंप्यूटर की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाए।

प्राचार्य को लेकर भी झोलझाल 
संस्था प्रशासक ने कई दिनों पहले वैश्य कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके गुप्ता को वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य का चार्ज दे दिया था। वैश्य कॉलेज एडिड कॉलेज है, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज सेल्फ फाइनेंस। नियमानुसार एडिड कॉलेज के प्राचार्य को सेल्फ फाइनेंस कॉलेज का चार्ज नहीं दिया जा सकता। एआईसीटीई की टीम के सामने भी कॉलेज प्रबंधन को इसका डर दिखाई दिया। टीम के सामने एआईसीटीई के रिकार्ड के अनुसार ऑफिशिएटिंग प्राचार्य डॉ. राजेश शर्मा ही रहे।

कर्मियों का था डर, बुला ली पुलिस 
वीटीआई में तो सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन को डर सता रहा था कि कहीं निकाले गए कर्मचारी कॉलेज में आकर हंगामा न कर दें। इसी डर के कारण टीम के कॉलेज में रहने तक पुलिस कॉलेज में ही मौजूद रही। 
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