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एआई से नई नाैकरियों के बन रहे अवसर : मोनिका

Sun, 19 Oct 2025 02:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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07...एमडीयू में सांख्यिकी विभाग की ओर से आयोजित चौथे विश्व सांख्यिकी दिवस पर उप​स्थित विभागाध्य
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रोहतक। एमडीयू रोहतक के सांख्यिकी विभाग की ओर से शनिवार को चौथे विश्व सांख्यिकी दिवस का आयोजन किया गया। विभाग ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डेटा एनालिटिक्स के छात्रों के लिए एक प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसमें प्रथम स्थान मोनिका को उनके प्रोजेक्ट एआई और भविष्य की नौकरियां अगली पीढ़ी के लिए कार्य का रूपांतरण के लिए प्राप्त हुआ।
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उनके शोध में यह सामने आया कि 2015 में जहां एआई अपनाने की दर केवल 5 प्रतिशत थी, वहीं 2024 तक यह 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि एआई नौकरियां समाप्त नहीं कर रहा बल्कि नए अवसर उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने मानवीय कौशल और एआई के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
विभाग अध्यक्ष प्रो. एससी मलिक ने कहा कि यह दिवस याद दिलाता है कि किस प्रकार सटीक और समयबद्ध आंकड़े नीति निर्माण, सतत विकास और सुशासन में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह निर्णयों के पीछे की ठोस बुनियाद है जो सरकारों, संगठनों और शोधकर्ताओं को जटिल समस्याओं का समाधान खोजने में सहायता करती है।
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इस वर्ष की वैश्विक थीम हर किसी के लिए गुणवत्तापूर्ण आंकड़े और डेटा रही, जो आंकड़ों की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और समावेशिता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। मुख्य अतिथि और निर्णायक के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुकेंद्र सिंह ने शिरकत की।
प्रतियोगिता में कुल 17 छात्रों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्त, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक नीति जैसे विविध क्षेत्रों को शामिल किया गया।
द्वितीय स्थान डिम्पी को उनके प्रोजेक्ट सेक्टर-वार क्लोजिंग प्राइस विश्लेषण के लिए मिला, जिसमें उन्होंने बैंकिंग, आईटी, ऊर्जा, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उनके अनुसार एक ₹1,00,000 का विविध एसआईपी पोर्टफोलियो 35.75 प्रतिशत तक बढ़ा जिसमें बैंकिंग और आईटी क्षेत्रों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तृतीय स्थान संयुक्त रूप से पुनीत और मंजू को प्राप्त हुआ। पुनीत ने इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक स्वीकृति और बैटरी लागत में आई गिरावट पर आधारित अपना अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने टिकाऊ और हरित भविष्य की संभावनाओं को उजागर किया।
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