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उत्तर भारत में पानीपत फिल्म पर लगाया जाए प्रतिबंध : मलिक

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रोहतक। मराठों व अहमदशाह अब्दाली के बीच 14 जनवरी 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई पर बनी फिल्म पानीपत में महाराजा सूरजमल के चरित्र चित्रण को लेकर जाट संगठन फिल्म निर्माता से नाराज हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति व नांदल खाप ने न केवल फिल्म पर उत्तर भारत में प्रतिबंध लगाने की मांग की है, बल्कि मंगलवार को समिति के सदस्य समाज के लोगों के साथ डीसी व एसपी को इसके लिए मांग पत्र देंगे।
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समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक सोमवार को जसिया पहुंचे और समिति के पदाधिकारियों की मीटिंग ली। मलिक ने कहा कि पानीपत फिल्म में इतिहास के तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके महाराज सूरजमल की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है। इससे जाट समाज के अंदर रोष है। मीटिंग में तीन प्रस्ताव पास किए गए। सबसे पहले फिल्म निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरा, मंगलवार को जिला स्तर पर संगठन के सदस्य समाज के लोगों के साथ मिलकर डीसी व एसपी को मांग पत्र देंगे, जिसमें जिले के अंदर फिल्म को बंद करने की मांग की जाएगी। तीसरा, हरियाणा के अलावा, यूपी, उतराखंड, दिल्ली, एमपी व राजस्थान की इकाइयों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि वहां भी फिल्म पर प्रतिबंध लगवाया जा सके।
नांदल खाप ने भी किया फिल्म का विरोध
रोहतक। पानीपत फिल्म में महाराजा सूरजमल के जीवन चरित्र को गलत तरीके से दिखाने के विरोध में नांदल भवन में नांदल खाप की सोमवार को बैठक हुई। अध्यक्षता ओमप्रकाश नांदल ने की। खाप महासचिव संजीत नांदल ने कहा कि जिस तरह शिवाजी अकेले मराठों के हीरो नहीं हैं और पृथ्वीराज चौहान अकेले राजपूतों के हीरो नहीं हैं उसी प्रकार महाराजा सूरजमल भी सिर्फ जाटों के हीरो न होकर पूरे देश के हीरो हैं। उनके गलत चित्रण का विरोध करना हर भारतवासी का कर्त्तव्य है। इस मौके पर लोकहित संस्था के प्रधान व नांदल खाप से संबंधित एडवोकेट चंचल नांदल, अठगामा बोहर के पूर्व प्रधान रणबीर नांदल, पूर्व सरपंच अजयपाल, कृष्ण कालिया, रामऋषि, विक्रम, प्रदीप, सतबीर नांदल, आशीष आदि मौजूद रहे।
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