रोहतक। पुलिस का ध्येय है सुरक्षा सेवा और समर्पण। इसी वाक्य को अपना धर्म मानकर जनता की सेवा करते हुए एक सिपाही के रूप में पुलिस में भर्ती होने के बाद कुलबीर गहलावत तरक्की पाकर अब इंस्पेक्टर पद तक पहुंच गए और मौजूदा समय में सांपला के एसएचओ हैं। यही नहीं पिता से सीख लेकर उनका बेटा भी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का अफसर बना जो आजकल पलवल में पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा दे रहा है। सेवा के दौरान एक आईपीएस अफसर का गनमैन रहने के दौरान बेटे को मन में आईपीएस बनाने की उनकी ललक थी जोकि बेटे ने पूरी कर दी।
यह सफलता भरी कहानी है सोनीपत के गांव निजामपुर माजरा (फरमाणा) में पैदा पुए कुलबीर गहलावत की। गांव के स्कूल में पढ़े लिखे कुलबीर 45 साल पहले 10वीं पास करके सिपाही भर्ती हुए थे। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले कुलबीर परिवार में अकेले नौकर पेशा बने। उन्होंने एएनएम संतोष गहलावत से शादी की और रोहतक में ही रहने लगे। मौजूदा समय में रोहतक सेक्टर चार के निवासी हैं। करीब दो साल से कुलबीर की तैनाती सांपला थाने में है। पुलिस की ओर से अनुशासन में रहना उनकी खासियत है। रोहतक में घर होने के बाद भी वह 15 किमी दूर सांपला थाने में ही रहते हैं। जब कभी रोहतक आना होता है तो पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में डालने के बाद ही आते हैं। इतना ही अफसरों को भी इनकी सेवा पर पूरा भरोसा है।
मैने नौकरी की पत्नी ने परिवार संभाला
कुलबीर अपने परिवार की सफलता का श्रेय एएनएम पत्नी संतोष गहलावत को देते हुए कहते हैं कि पुलिस सेवा में आकर परिवार देखभाल का जिम्मा तो पत्नी के ऊपर ही रहा। उसने सिविल अस्पताल में अपनी ड्यूटी करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई लिखाई खुद देखी। मै जब एक आईपीएस अधिकारी के पास गनमैन तैनात था तब मुझे लगता था कि मेरा बेटा भी आईपीएस अफसर बने। यही सोचकर बेटों को पढ़ाया। बड़े बेटे दीपक ने सीख लेकर आईपीएस बनकर मेरा सपना पूरा किया है। वह इन दिनों पलवल में एसपी के पद पर तैनात है।
बड़ी बहू आईआरएस, छोटी आईईएस
कुलबीर कहते हैं कि छोटा बेटा मोहित गहलावत गुरग्राम में व्यवसाय करता है। बड़े बेटे आईपीएस दीपक गहलावत की पत्नी सीमा धनखड़ आईआरएस हैं जोकि आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त है। छोटे बेटे मोहित की पत्नी ज्योति गहलावत आईईएस हैं जोकि रेलवे में इंजीनियर है। पूरा परिवार पड़ा लिखा और नौकरी पेशा है। मोहित ने भी आईएएस की परीक्षा दी लेकिन उन्होंने बाद में व्यवसाय को ही चुना।
मेरा परिवार ही मेरी कमाई
कुलबीर कहते हैं कि सेवा के दौरान उन्होंने अपने परिवार को ही अपनी कमाई समझा है। यही मेरी पूंजी है। परिवार को खड़ा करने में पत्नी संतोष गहलावत का सबसे अहम योगदान है।
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कुलबीर पुलिस विभाग के लिए सफलता की मिसाल हैं। खुद सिपाही से इंस्पेक्टर तक कामयाब होकर कार्य कर रहे हैं। बेटे को आईपीएस बनाया। सेवा के लिए समर्पित हैं। किसी भी पुलिस कर्मी का बच्चा अगर मेधावी है तो उसे आगे बढ़ाने के लिए वेलफेयर शाखा की ओर से मिलने वाली मदद को प्रमुखता दी जाती है। सभी से अपील है कि वह कुलबीर की तरह महकमे में मिसाल बने और अपने बच्चों के भविष्य का खयाल रखें।
-राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक, रोहतक।
कुलबीर गहलावत