पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा है कि माफी न मांगना उनका निजी स्टैंड था। किसानों के आंदोलन के मामले में उन्होंने पार्टी के आदेश का पालन किया है। ग्रोवर ने कहा कि हिसार वाली घटना के लिए उन्होंने पहले ही दिन ही खेद प्रकट कर दिया था। लेकिन वह पहले दिन से कह रहे हैं कि जब उन्होंने कोई गलती नहीं की तो वह माफी किस बात की मांगें। उनका यह भी पहले दिन से स्टैंड था कि वह किसी भी कीमत पर धरनास्थल पर नहीं जाएंगे। लेकिन यह उनका निजी स्टैंड था। शनिवार को पार्टी ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई, जिसमें जिलाध्यक्ष अजय बंसल को सारे अधिकार सौंप दिए गए।
जिलाध्यक्ष बंसल ने वरिष्ठ नेता सतीश नांदल की अगुवाई में एक कमेटी गठित करने का फैसला किया। कमेटी ने ही फैसला किया कि इस मामले को निपटाया जाए। कमेटी ने ही जिला प्रशासन से तालमेल किया, जिन्होंने आगे किसान नेताओं से संपर्क किया। उसके बाद तीनों पक्ष एक मेज पर आए। कमेटी के सदस्यों ने ही उन्हें देर रात सिंचाई विश्राम गृह में बुलाया। उसके बाद किसान संगठनों ने हिसार से आई महिला प्रदर्शनकारियों को बुला लिया। जब उन्होंने महिलाओं को देखा तो तो वे काफी बुजुर्ग थीं। उनकी माता समान थीं, इसलिए उन्होंने चरण स्पर्श कर लिए, महिलाओं ने उन्हें आशीर्वाद दे दिया। उसके बाद सौहार्दपूर्ण माहौल में सारा विवाद खत्म हो गया।
किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि भाजपा की पहल पर प्रशासन ने हमें रात 11 बजे बैठक के लिए बुलाया। किसान संगठन पहले दिन से मांग कर रहे थे कि ग्रोवर माफी मांगे या उनके खिलाफ पर्चा दर्ज किया जाए। फिर बिना माफी मांगे धरना कैसे खत्म हो सकता है। उधर, धरनास्थल रविवार सुबह साफ हो गया, किसानों ने अपना टेंट और सामान उठा लिया, पुलिस ने भी अवरोधक हटा लिए।