रोहतक। पीजीआईएमएस के वार्ड नंबर 5 में वीरवार को ऑक्सीजन सिलिंडर लीक हो गया था, जिससे वार्ड में अफरा-तफरी मची और एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसे गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। परिजनों ने मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मौके पर मौजूद रहे मरीजों ने बताया कि लीक होते ही ऑक्सीजन सिलिंडर से जानलेवा स्थिति बन गई थी। चिकित्सकों ने वार्ड का दरवाजा बंद करने की कोशिश की, लेकिन बंद नहीं हो सका, अगर बंद हो जाता तो सिलिंडर के दबाव से दरवाजा अंदर गिरने की आशंका थी। कई मरीज डर के मारे बिस्तरों के नीचे छुप गए।
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडर खोलने का काम बैरर का नहीं है। यह स्टाफ नर्स की जिम्मेदारी है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हमें घटना की जानकारी पहले नहीं दी गई, बल्कि मीडिया को पहले बता दिया गया।
कहना है कि एक डॉक्टर सब कुछ नहीं देख सकता, इसलिए प्रत्येक स्टाफ को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और अस्पताल प्रशासन पर सुरक्षा उपायों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
मरीजों से बातचीत
जींद निवासी नवीन ने बताया कि फ्लो मीटर का एक टुकड़ा उनकी आंख के पास जा लगा। अगर वह टुकड़ा आंख के अंदर चला जाता तो मेरी आंख जा सकती थी। डॉक्टर ने बस एक आई ड्रॉप दे दी, किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
नारा गांव के रामदिया, जो एक्सीडेंट पीड़ित है, इनके तीमारदार ने बताया कि जब सिलिंडर लीक हुआ तो उनके मरीज की ऑक्सीजन हटा दी गई और दूसरे मरीज को दे दी गई। करीब 45 मिनट बाद हमारे मरीज को दोबारा ऑक्सीजन दी गई। तब तक उसकी हालत बिगड़ चुकी थी। इन्होनें यह भी आरोप लगाया कि जब चिकित्सकों से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, हम चिकित्सक हैं, तुम नहीं।