संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दांतों पर कीटाणुओं की परत जमना दांतों में कीड़ा लगने की मुख्य वजह है। यह परत तब जमती है, जब लंबे समय तक दांतों की सही तरीके से सफाई नहीं होती। पीजीआईडीएस में कार्यरत डॉ. आदर्श ने बताया कि यह समस्या अधिकतर ऊपर वाले दांतों में देखने को मिलती है। चिपकने वाले खाद्य पदार्थ इन कीटाणुओं को पोषण देते हैं जिससे वे तेजी से फैलने लगते हैं। इसके कारण दांतों का पीएच मान धीरे-धीरे कम होने लगता है और कैविटी की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (पीजीआईडीएस) में रोजाना औसतन 600 मरीज दांतों की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। कई बार ओपीडी में यह संख्या 800 तक भी पहुंच जाती है। इनमें हर तरह के मरीज शामिल हैं। दांतों में कीड़ा लगने की प्रक्रिया एक दिन या कुछ महीनों की नहीं होती बल्कि यह लंबी प्रक्रिया है।
आमतौर पर दांतों में कीड़ा लगने में तीन से चार साल का समय लगता है। दांत की तीन परतें होती हैं। पहली परत बेहद नाजुक होती है जिसमें कीटाणुओं के फैलने का पता भी नहीं चलता। दूसरी परत में पतली और संवेदनशील नसें होती हैं। जब कीटाणु इस परत तक पहुंचते हैं तो ठंडा और गर्म खाने पर झनझनाहट महसूस होने लगती है।
संक्रमण दांत की अंदरूनी परत तक पहुंच जाता है, तब इसे प्लाक कहा जाता है। अब समस्या गंभीर हो जाती है। इस स्थिति में दर्द भी अधिक होने लगता है। शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लगती है तो उस हिस्से मेंं सूजन आ जाती है लेकिन दांत चारों तरफ से बंद होने के कारण सूजन नहीं हो पाती। ऐसे में दांत के भीतर दबाव बढ़ता है और तेज दर्द शुरू हो जाता है। कीटाणुओं को फैलने का रास्ता मिलने पर धीरे-धीरे पूरे दांत को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।
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कीड़ा लगने के प्रमुख कारण
सही तरीके से ब्रश न करना
चिपकने वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन
बहुत ज्यादा ठंडा और गर्म खाना
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बचाव के उपाय....
रात को जरूर ब्रश करें
मीठा सीमित मात्रा में लें
खाने के बाद कुल्ला करें
ज्यादा पानी पीएं ताकि लार की गुणवत्ता बनी रहे