सोनीपत के गोहाना में कथूरा गांव एक ऐतिहासिक गांव। संवाद
गोहाना। गांव कथूरा केवल इतिहास, परंपरा, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। करीब 18 हजार की आबादी और लगभग 8 हजार मतदाताओं वाले इस गांव ने वर्षों से अपनी विशिष्ट पहचान कायम रखी है। नरवाल खाप के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध कथूरा आज भी अपनी गौरवशाली परंपराओं को संजोए हुए विकास और सामाजिक एकता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।
ग्रामीण नवीन और अधिवक्ता विकास के अनुसार कथूरा गांव का इतिहास सदियों पुराना है। गांव के पूर्वज राजस्थान के ददरेड़ा क्षेत्र से आकर यहां बसे थे और उन्होंने ही इस गांव की नींव रखी थी। यह ऐतिहासिक विरासत आज भी ग्रामीणों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाने वाली यह गौरवगाथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है। कथूरा गांव पांच प्रमुख पानों में विभाजित है, जिनमें न्याण-ग्याण, करमसण, कालिया, भैभराण और प्रब्याण पाना शामिल हैं। इनमें न्याण-ग्याण पाना सबसे बड़ा माना जाता है। गांव का यह सामाजिक ढांचा वर्षों से सहयोग की भावना को मजबूत करता आया है।
सोनीपत के गोहाना में कथूरा गांव एक ऐतिहासिक गांव। संवाद
सोनीपत के गोहाना में कथूरा गांव एक ऐतिहासिक गांव। संवाद
सोनीपत के गोहाना में कथूरा गांव एक ऐतिहासिक गांव। संवाद