विजेंद्र कौशिक
रोहतक। बिजली निगम ने 10 साल पहले काटे गए जाट संस्था के कनेक्शन का 9.49 लाख रुपये मातूराम इंजीनियरिंग कॉलेज के बिल में जोड़कर भेज दिया। कॉलेज की अर्जी पर जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन नागेंद्र कादयान ने शुक्रवार को बिल वसूली पर रोक लगाते हुए निगम पर 10 हजार रुपये सेवाओं में कमी मानते हुए जुर्माना लगाया है। पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर एक माह में देने का भी आदेश दिया है।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, मातूराम इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रीशियन पवन सिंह ने सितंबर 2019 में याचिका दायर की थी कि कॉलेज को भूमि दान में दी गई जहां भवन निर्माण कराया गया था। 2.03 लाख रुपये जमा कराने के बाद मई 2008 को बिजली कनेक्शन मिला था। कॉलेज ने प्रक्रिया शुल्क के रूप में 500 रुपये जमा कराए।
16 फरवरी 2018 तक कॉलेज की ओर कोई राशि बकाया नहीं थी। 20 मार्च 2018 को बिजली निगम ने 7,75,120 रुपये का बिल बनाकर भेज दिया। शिकायत के बावजूद बिल ठीक नहीं किया गया। पता चला कि 2008 से पहले जाट कॉलेज के परिसर में कॉलेज के कर्मचारियों के आवास में प्राचार्य के नाम से बिजली कनेक्शन लगाया गया था।
इसकी बकाया राशि का भुगतान करने के बाद कनेक्शन काट दिया गया था। बिजली निगम के रिकाॅर्ड में काटे गए कनेक्शन का बिल जोड़ा जाता रहा। 2019 में 9.49 लाख रुपये बिल बनाकर भेज दिया। आयोग ने अर्जी पर बिजली निगम को नोटिस दिया।
निगम ने कहा कि बिजली कनेक्शन डीसी-12-0019 उसी परिसर में जाट कॉलेज रोहतक के नाम से स्थापित किया गया था। शिकायतकर्ता उसी परिसर में पिछले बिजली कनेक्शन की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
आयोग ने दोनों पक्षों की बहस व दस्तावेज की जांच के बाद कहा कि जाट कॉलेज के प्राचार्य का बिजली कनेक्शन 2008 में भौतिक रूप से काट दिया गया था लेकिन निगम ने अपने रिकॉर्ड में इसे जारी रखा। बिजली निगम जारी बिल राशि, जुर्माना या ब्याज की वसूल न करे।