रोहतक। पीजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) डाॅ. कुंदन मित्तल पर संस्थान की दलित महिला चिकित्सक की ओर से लगाए गए मानसिक व जातिगत प्रताड़ना के आरोप मामले में जांच शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विज्ञान विवि ने इसके लिए कमेटी गठित कर दी है। अमर उजाला में पांच नवंबर के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
पीजीआईएमएस की एक दलित महिला चिकित्सक ने करीब तीन माह पहले मेडिकल सुपरिंटेंडेंट पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा था कि वह पिछले 14 साल से संस्थान में सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। अब पिछले कुछ समय से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
आरोप है कि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए मरीजों के सामने कई बार उनसे गलत भाषा का इस्तेमाल किया। उन्हें नीचा दिखाने का भी प्रयास किया गया। इसकी शिकायत राज्य अनुसूचित जाति आयोग को भी भेजी गई थी। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने इन आरोपों को गलत बताया था। संवाद
राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने एक सप्ताह में मांगी थी जांच रिपोर्ट
दलित चिकित्सक की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एसके सिंघल को 15 दिसंबर 2025 को पत्र लिखा था। इसमें मामले की जांच के साथ आवश्यक कार्रवाई करते हुए जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में भेजने के निर्देश दिए थे। हालांकि, एक माह से ज्यादा हो चुका है लेकिन अभी भी कमेटी गठित कर जांच प्रक्रिया ही चल रही है।
स्वास्थ्य विज्ञान विवि की तरफ से कमेटी गठित कर दी गई है। आवश्यक जांच प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई