सिरसा। सरकार द्वारा बिजली की दरों में की गई कमी को नाकाफी बताते हुए आंदोलनकारियों ने शनिवार को सिरसा में बाजारों को बंद रखा। बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। शनिवार को बिजली आंदोलन संघर्ष समिति, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन और अखिल भारतीय नौजवान सभा की ओर से बंद का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड के सामने आधा घंटे तक नेशनल हाईवे पर यातायात जाम कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें न मानी गई तो मंत्रियों और विधायकों का घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि बिजली बिलाें का बहिष्कार जारी रहेगा।
बिजली बिल ढाई रुपये प्रति यूनिट करने की मांग को लेकर शनिवार को कई संगठनों ने सिरसा बंद का आह्वान किया। समिति के आह्वान पर करीब 150 ग्राम पंचायतों में उपभोक्ताओं ने पिछले छह माह से बिजली बिलों का बहिष्कार किया हुआ है। शनिवार को संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक रोशन सुचान, सह संयोजक मनोज पचेरवाल, प्रवक्ता भोला, जिला संयोजक हरबंस लाल शर्मा, शहरी संयोजक हैप्पी बक्शी, वेद प्रकाश भरोखा, रामकिशन और लीला राम के नेतृत्व में जिलेभर से आए लोग पहले टाउन पार्क में एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारी जत्थों के रूप में बाजारों में गए, जहां पर उन्होंने दुकानों को बंद करवाया। बंद में महिलाएं भी काफी संख्या में शामिल थीं। बाजार में प्रदर्शनकारियों के जाते ही दुकानें खुलने शुरू हो गई।
आधे घंटे तक बस स्टैंड पर फंसे रहे यात्री
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेताने के लिए डबवाली रोड पर स्थित लाल बत्ती चौक पर यातायात जाम कर दिया। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड की ओर रुख किया। बस स्टैंड के बाहर नेशनल हाईवे पर बैठकर प्रदर्शनकारियों ने यातायात जाम कर दिया। डीएसपी किशोरी लाल ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। आधे घंटे तक बसें स्टैंड पर बसों का आवागमन ठप रहा। रोशन सुचान ने कहा कि जब तक ढाई रुपये प्रति यूनिट बिजली दर नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने सिरसा बंद से सबक नहीं लिया तो पूरे प्रदेश में बंद किया जाएगा। सह सचिव मनोज पचेरवाल ने कहा कि बिजली बिलों का बहिष्कार करने वाले गांवों का बकाया माफ नहीं हुआ तो कांग्रेस के सभी विधायकों और मंत्रियों का घेराव किया जाएगा। सुचान ने कहा कि कांग्रेस का लोग चुनावों में भी बहिष्कार कर सकते हैं। उन्हाेंने कहा कि सरकार के गलत फैसलाें का विरोध करना विपक्षी दलों का काम होता है लेकिन अब तक यह काम जनता को सड़कों पर स्वयं उतरकर करना पड़ रहा है।
ये हैं मांगें
बिजली संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक रोशन सुचान ने कहा कि बिजली की दरें ढाई रुपये प्रति यूनिट की जाए। तेज चलने वाले मीटरों को बदलकर पुराने काले मीटर लगाए जाएं। वहीं, प्रदेश में दूसरे जिलों में संगठन पिलर बॉक्स प्रणाली का विरोध कर रहे हैं और बिजली निगमों का आडिट करवाने की मांग की जा रही है। वहीं, संगठन सभी तरह के सरचार्ज हटवाने की मांग कर रहे हैं। संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन करने के बाद सरकार ने वीरवार को बिजली के दामों में लगभग डेढ़ रुपये प्रति यूनिट की कमी की थी।