बाढड़ा/भिवानी। उत्तर भारत के किसान नेता व भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि देश का किसान आज कर्ज के बोझ से पूरी तरह घिर चुका है। संसद में रखी रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि पिछले 15 वर्षो में लगभग दो लाख सत्तर हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। केंद्र सरकार द्वारा पारित बीज विधेयक कानून व एफडीआई किसानों को विदेशी ताकतों के चंगुल में फंसा देगा। 18 मार्च 2013 को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर अपनी आने वाली जमातों के भविष्य की रक्षा के लिए कड़ा कदम उठाया जाएगा। टिकैत ने शनिवार को बाढड़ा में अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि कृषि व्यवस्था की बेहतरी के लिए देश की सरकारें आए दिन तथ्यहीन बयान जारी कर देती है लेकिन धरातल पर किसान की माली हालात के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। दुर्भाग्य की बात है कि भारत जैसे देश में हर तीसरे मिनट एक किसान कर्ज के तानों या कानून के भय के चलते मौत को गले लगा रहा है। हर दूसरा किसान ग्रामीण और राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्जों के सहारे अपने परिवारों का पेट भर रहा है इसी कारण बैंक नियमों में स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए छटपटा रहा है। पहले किसान अपने खेत के उत्पादित अनाज को अगले वर्ष बिजाई कर देता लेकिन मौजूदा दौर में हम अमेरिका जैसे देशों द्वारा आयातित बीज की बिजाई कर हर छह माह में विदेशी कंपनियों का मुंह ताकते रहते हैं।
बीज विधेयक के मौजूदा प्रारुप से उत्तरी भारत के लगभग एक करोड़ से भी ज्यादा किसान प्रभावित होंगे लेकिन केन्द्र सरकार अमेरिका जैसे देशों के दबाव में इसे लागू कर हमारे खलिहान तक को गिरवी रख रही है। देश में एफडीआई पर उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों को देशविरोधी फैसले लेने के लिए बराबर जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में जब एनडीए सरकार ने संसद पटल पर एफडीआई प्रस्ताव लाया तो मौजूदा विपक्ष के नेता डा. मनमोहन सिंह ने इसे भारतीय बाजार और किसान के लिए सर्वनाशकारी कदम बताया वहीं अब जब यूपीए सरकार वालमार्ट को विदेशों के दबाव में एफडीआई ला रही है तो अब भाजपा इसे 30 करोड़ व्यापारियों का हवाला देकर लागू करने से मना कर रही है। लेकिन इस मामले में भोलेभाले किसान के हित की कोई नहीं सोच रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को अगर अपने जमीर और जमीन की रक्षा करनी है तो संगठित होकर किसान विरोधी नीतियों का विरोध करना होगा। उत्तरी भारत के किसानों के मसीहा रहे स्व. महेन्द्र सिंह टिकैत का दक्षिणी हरियाणा से लंबे समय तक जुड़ाव रहा और वे हमेशा यह मानते थे कि दिल्ली सरकार पर दबाव बनाना या आंदोलन सफल करना है तो हरियाणा के किसानों को जागृत कर आगे लाना होगा इसलिए अब वे भी 18 मार्च को 2013 को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता के लिए हरियाणा के सभी जिलों का दौरा कर लोगों को दिल्ली का न्योता देंगे। कृषि और किसान की दशा के लिए किसान का राष्ट्रीय स्तर पर आत्ममंथन करना चाहिए। उनके साथ भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह, जाट महासभा प्रदेश अध्यक्ष व भाकियू के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश मान, प्रकाश पहलवान भी मौजूद थे।