दिवाली पर शहर के आउटर की एक साल पहले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वैध हुई 99 कॉलोनियों की गलियां रोशन नहीं हो पाएंगी। क्योंकि नगर निगम के पास न तो नई स्ट्रीट लाइट खरीदने के लिए न तो कोई प्लान और न बजट है। ऊपर से हर रोज शहर के अंदर लगी 30 हजार स्ट्रीट लाइट में से औसतन 30 से 40 खराब हो रही हैं। हाउस की मीटिंग में एक बार में एक लाख की स्ट्रीट लाइट खरीदने का वादा भी अभी धरातल पर नहीं उतरा है।
रोशनी के त्योहार दिवाली को हर साल उत्साह व उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके लिए आम लोग अपने घरों व आंगन को रोशन कर लेते हैं, जबकि नगर निगम की जिम्मेदारी शहर की गलियां, चौक व चौराहों को रोशन करने की रहती है। पिछले साल दिवाली से काफी समय पहले ही निगम ने सिविल रोड को लड़ी लगाकर रोशनी से जगमग कर दिया था। हालांकि इस बार न तो कोई चुनाव है और निगम कोरोना के नाम पर बजट न होने की बात कह रहा है। हालत यह है कि पिछले विस चुनाव से पहले सरकार ने आउटर की 99 कॉलोनियों को वैध किया था। एक साल में बिजली निगम ने तो पोल लगा दिए, लेकिन नगर निगम स्ट्रीट लाइट नहीं लगा सकता है। अक्तूबर माह में हुई नगर निगम हाउस की मीटिंग में भी वार्डों के अंदर स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग उठाई थी, लेकिन उस पर निगम ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।
शहर में 30 हजार स्ट्रीट लाइट प्वाइंट
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में 30 हजार के करीब स्ट्रीट लाइट प्वाइंट हैं। इसमें 70 प्रतिशत सोडियम व 30 प्रतिशत एलईडी लाइट लगी हैं। इसमें पुराने सोडियम प्वाइंट पर लगातार स्ट्रीट खराब होने की शिकायत निगम के कंट्रोल रूम में आ रही हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि वे खराब लाइटों को तत्काल ठीक करते हैं, लेकिन स्ट्रीट लाइट की कमी जरूर झेल रहे हैं।
वार्ड 10 के पार्षद ने मांगी थी सबसे ज्यादा लाइट
15 दिन पहले अक्तूबर माह में हाउस की मीटिंग हुई, जिसमें वार्ड नंबर 10 के पार्षद राहुल देशवाल ने कहा था कि उसका वार्ड सबसे बड़ा है, जिसमें बलियाणा, गढ़ी बोहर, खेड़ी साध, पहरावर व कन्हेली का एरिया आता है। उसे सबसे ज्यादा स्ट्रीट लाइट चाहिए। इसके अलावा 22 में से 15 से ज्यादा पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड में स्ट्रीट लाइट की कमी बताई थी। निगम आयुक्त ने कहा था कि मुख्यालय स्तर पर एक ही कंपनी को पूरे प्रदेश में स्ट्रीट लाइट लगाने व उसकी देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में निगम को अलग से स्ट्रीट लाइट खरीदने के लिए बजट नहीं मिल सकता। ऐसे में वे अपने स्तर पर एक बार में एक लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट खरीद सकते हैं।
दावा : खराब स्ट्रीट लाइट की यहां करें शिकायत, 24 घंटे में ठीक करेगा निगम
वहीं, निगम की स्ट्रीट लाइट ब्रांच के अधिकारी प्रवीण दलाल ने बताया कि निगम ने स्ट्रीट लाइट से संबंधित शिकायत दूर करने के लिए शिकायत केंद्र खोल रखा है। इसके लिए निगम के हेल्प लाइन नंबर 1800-180-5007 पर शिकायत कर सकते हैं। 24 घंटे में लाइट को ठीक किया जाएगा।
हर माह 40 लाख रुपये बिल देता है निगम
निगम की ओर से स्ट्रीट लाइट के हर पोल पर बिजली का मीटर लगाने की प्लानिंग हैं, लेकिन इसके लिए बजट नहीं है। फिलहाल 30 प्रतिशत पोल पर बिजली का मीटर लगे हैं। ऐसे में नगर निगम अनुमान के मुताबिक खर्च का हिसाब लगाकर बिजली निगम को हर माह 40 लाख रुपये से ज्यादा बिल के तौर पर देता है। देेखरेख के लिए निगम ने शहर को पांच जोन में बांटा हुआ है। तीन जोन का ठेका एक कंपनी व दो जोन का दूसरी कंपनी को दिया हुआ है।
एक लाख रुपये में मात्र 30 स्ट्रीट लाइट आएंगी। जबकि डिमांड कई गुणा ज्यादा है। हाउस की मीटिंग की प्रोसिडिंग रिपोर्ट मिली है, लेकिन उसमें भी स्ट्रीट लाइट खरीदने का जिक्र नहीं है। ऐसे में निगम के अधिकारी ही बता सकते हैं कि कब और कैसे स्ट्रीट लाइट खरीदी जाएंगी।
-मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम।
शहर में 30 हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइट प्वाइंट हैं, जिनमें किसी को खराब नहीं रहने देंगे। जहां जरूरत होगी, उसे बदला जाएगा। इसके लिए जल्द स्ट्रीट लाइट ब्रांच की मीटिंग लेंगे। बड़े पैमाने पर स्ट्रीट लाइट खरीदने की जिम्मेदारी सरकार ने प्रदेश स्तर पर एक कंपनी को दे रखी है। उसके बारे में वे कुछ नहीं कह सकते।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।