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महिलाओं को लुभा रहे मिट्टी के डिजाइनर करवे, मांग बढ़ने से कुम्हारों को राहत

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karwchoth special
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रोहतक। करवाचौथ की रात करवे से पानी पी कर ही सुहागिनें अपना व्रत खोलती हैं। इसलिए करवे का सबसे अधिक महत्व है। करवाचौथ आने में केवल पांच दिन शेष हैं। इसलिए अपनी चाक को गति देते हुए कुम्हार करवे तैयार करने में मशगूल हो गए हैं। हालांकि बाजारों में पीतल और तांबे के करवे भी हैं। लेकिन फिर भी इस बार महिलाएं मिट्टी के करवे को बढ़ावा दे रही हैं। बाजार में मिट्टी के डिजाइनर करवों की भरमार है। छोटे से बड़े साइज के करवा के रेट 15 से 40 रूपए है।
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इस बार मिट्टी के करवों की मांग बढ़ी, कुम्हार राजीव कुमार ने जताया संतोष
पहाड़ा मोहल्ला निवासी कुम्हार राजीव कुमार के परिवार में पिछले 60 वर्षों से मिट्टी के दीए और मायके बनाने का काम चला आ रहा है। करवाचौथ के समय वे मिट्टी करवे भी तैयार करते हैं। हर साल करवों की ज्यादा बिक्री नहीं हो पाती थी। लेकिन इस बार महिलाएं मिट्टी के करवे खरीदने अधिक आ रही हैं। एक करवा 30 रुपये का है। इस बार मिट्टी के करवों की मांग में वृद्धि हुई है। इस बार दीवाली पर अच्छे दिन आने की उम्मीद नजर आ रही है। क्योंकि लोग विदेशी चीजों को छोड़ कर स्वदेशी मिट्टी के पात्रों को पसंद कर रहे हैं। एक परिवार की महिलाएं अपने लिए स्पेशल करवों के ऑर्डर भी से रही हैं।
एक मिनट में एक करवा तैयार
कुम्हार राजीव कुमार ने एक मिनट में एक करवा तैयार कर के दिखाया। इसे बनाने के लिए नदी के किनारे से चिकनी मिट्टी ले के आते हैं। पानी और मिट्टी को गूथ कर रख हुआ है। चाक की चकरी पर पानी से सनी हुई मिट्टी को रख कर हाथों से करवे को आकर दिया जाता है। चाक पर करवा बनाने में एक मिनट का समय लगता है।
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करवे तैयार करने में जुटा पूरा परिवार
कुम्हार हरीश अपने भाई, बेटे और भांजों के साथ यह तैयार कर रहे हैं। चाक की चकरी से करवा उतारने के बाद करवे में एक छेद करते हैं और उसे धूप और हवा में सूखने के लिए रख देते हैं। सूखने के बाद परिवार के सदस्य सभी करवों को आग में तपा कर पक्का करते हैं। पक्का होने के बाद उस पर रंग रोगन किया जाता है। कई करवों को लेस, शीसे और मोतियों से भी सजाया जाता है। इन करवों के रेट 15 से 40 रुपये तक हैं।
मिट्टी के करवे का महत्व
करवाचौथ पूजन थाली में छलनी, दिया और करवा होता है। छलनी ओर दिए से चांद के दीदार के बाद बारी आती है करवे से पानी पी कर व्रत खोलने की। करवा बनाने के लिए मिट्टी, पानी , धूप, हवा और आग का इस्तेमाल होता है। इस तरह से पांच तत्वों का समावेश हैं। पांच तत्वों को पूजा में शुभ मना जाता है। इसलिए इससे पानी पी कर सुहागनें व्रत खोलती हैं।
बाजार में पीतल और तांबे के करवे
महिलाएं पीतल और तांबे के करवे भी खरीद रही हैं। बर्तनों की दुकानों पर यूं तो काफी भीड़ नजर आ रही है। लेकिन इस बार पीतल और तांबे के करवे की डिमांड कम है। पीतल का करवा 200- 250 रूपए से शुरू है। वहीं तांबे का करवा 300 रूपए से शुरू है। इन धातुओं में डिजाइनर करवों की भरमार भी है। लेकिन मिट्टी के सजावटी करवे इन धातुओं को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं।
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