कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण पीजीआईएमएस ब्लड बैंक और थैलीसीमिया के पीड़ियों को हो रही रक्त की कमी को दूर करने के उद्देश्य से अमर उजाला फाउंडेशन, रेडी टू हेल्प सोसायटी, आपके साथ संस्था की ओर से सैनी धर्मशाला चुन्नीपुरा में रक्तदान शिविर लगाया गया। शिविर में 98 लोगों ने रक्तदान किया। 40 डिग्री तापमान में भी रक्तदाताओं का हौसला बुलंद रहा। वहीं, 80 से ज्यादा बार रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया। इस मौके पर उपायुकत आरएस वर्मा, नगर निगम मेयर मनमोहन गोयल, वैश्य सोसायटी के पूर्व प्रधान एवं समाज सेवी नवीन जैन, महामंडलेश्वर कपिलपुरी महाराज, महंत कर्णपुरी मौजूद रहे।
दिल्ली से आई भारतीय रेडक्रास सोसायटी की टीम
रक्तदान शिविर में पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक की टीम ने तकनीकी सहयोग दिया। इसमें डॉ. कुसुम, लैब असिस्टेंट सुमन, लैब टैक्नीशियन चांद सिंह, स्टाफ नर्स बीरमति, रमन, आशिमा, बैरर रचना शामिल रही। इसके अलावा दिल्ली से भारतीय रेडक्रास सोसायटी की टीम भी विशेष रूप से शिविर में पहुंची। सोसायटी थैलीसीमिया मरीजों के लिए ब्लड मुहैया कराती है। इसमें टीम इंचार्ज डॉ. सागर खन्ना, टेक्निशियन अमित, चेतन, रंजीत, अरुण, सविंदर, भारत, सोशल वर्कर विनोद, शेर सिंह व चिरंजीलाल शामिल रहे।
80 से ज्यादा बार रक्तदान करने पर मिला सम्मान
शिविर में स्वामी सत्यमुनी को 144वीं बार, गोवर्धन ने 130वीं बार, सुरेंद्र सिंह ने 127वीं बार, रणबीर ने 123वीं बार, सुंदर जेटली ने 122वीं बार, दारा सिंह ने 109वीं बार व राज कुमार मोर ने 89वीं बार रक्तदान किया। इन सभी को शिविर में सम्मानित किया गया। इसके अलावा पहली व दूसरी बार रक्तदान करने वाले में अंतर्राष्ट्रीय शूटर काजल सैनी, उनका भाई जीवेश सैनी व गौरव सैनी मौजूद रहे।
डरें नहीं, रक्तदान करें : गौड़
शिविर के संयोजक आपके साथ संस्था अध्यक्ष जेपी गौड़ ने कहा कि कोरोना के संक्रमणकाल में डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत हैं। रक्तदान से शरीर पर किसी तरह का असर नहीं होता है। महामारी के इस दौर में पीजीआई के ब्लड में भी रक्त की कमी हो गई है। इसलिए रक्तदान जरूर करना चाहिए। खुद 37 बार रक्तदान कर चुके संस्था अध्यक्ष ने युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया।
समाज के काम आने की सोच से लगाया शिविर
रेडी टू हेल्प संस्था के अध्यक्ष विजय कुमार सैनी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य है कि समाज के काम आएं। इसी सोच से यह रक्तदान शिविर लगाया। दान किए गए रक्त का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए रक्तदान करना चाहिए। सरकार से 21 बार सम्मानित संस्था ऐसे शिविर लगाने के साथ मजदूरों को खाना व राशन भी पहुंचा रही है। बाल भवन आश्रम में एक माह का राशन देने के अलावा 500 जरूरतमंद लोगों को सूखा राशन भी वितरित किया।
रक्तदान के प्रति शूटर काजल बी-पॉजिटिव
बी-पाजिटिव यह मेरा ब्लड ग्रुप ही नहीं, सोच भी है। इसी सकारात्मक सोच ने दोहा एशियन शूटिंग गेम्स का चैंपियन बनाया। लोगों ने गोल्ड मेडलिस्ट राइफल शूटर का खिताब दिया। कोरोना के कारण घर रह कर शूटिंग की प्रैक्टिस कर रही हूं। शिविरों में तीन बार 9.5 ग्राम हीमोग्लोबिन मिलने पर रक्तदान से वंचित रही। रविवार को 12.5 हीमोग्लोबिन होने पर पहली बार रक्तदान का मौका मिला। रक्तदान कर अच्छा लगा।
- काजल सैनी, अंतर्राष्ट्रीय राइफल शूटर।
हमारा दान किया रक्त किसी का जीवन बचा सकता है। वर्ष 2017 से खुद रक्तदान कर रहा हूं। रविवार को शिविर में 47वीं बार रक्तदान किया। पहली बार दोस्त की बेटी के लिए रक्तदान किया था। उसका दिल में छेद का ऑपरेशन होना था। इसके बाद से लगातार रक्तदान अभियान जारी है।
- डॉ. देवेंद्र सभरवाल, सामान्य अस्पताल।
रक्तदान अभियान की शुरूआत 1996 में कालेज समय में की थी। जरूरतमंद की जरूरत पूरी हो, इस उद्देश्य के साथ रक्तदान किया था। इसके बाद से जब भी आसपास कोई शिविर लगता है या किसी को जरूरत होती है, तो रक्तदान जरूरत करता हूं।
- रवींद्र सैनी, सदस्य, रेडी टू हेल्प।
आपात स्थिति में किसी का जीवन बचा सकूं। इसके लिए रक्तदान करता हूं। रविवार को आठवीं बार रक्तदान किया। यहां संस्था की ओर से रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए पहले रक्तदान किया फिर शिविर में अपनी ड्यूटी निभाई।
- अनूप सिंह, सदस्य, रेडी टू हेल्प।
रक्तदान मुहिम 19 साल की उम्र में शुरू की थी। पहली बार 12वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान चाकू से घायल के लिए रक्तदान किया था। इसके बाद से रक्तदान मुहिम थमी नहीं है। रविवार को 70 की उम्र में 145वीं बार रक्तदान किया। इसके लिए मंच पर सम्मान भी मिला।
- स्वामी सत्यमुनी, मकडौली कलां।
रक्तदान अपनी 20 साल की उम्र से करता आ रहा हूं। अब तक 122 बार रक्तदान कर चुका हूं। पहली बार अपने रिश्तेदार की जान बचाने के लिए रक्तदान किया था। उसे खून की सख्त जरूरत थी। इसलिए अब भी रक्तदान करता हूं। लोगों को भी जागरूक बनाने का प्रयास करता हूं।
- रणबीर, मकडौली कला।
रक्तदान दूसरों की मदद का बेहतर साधन है। इसलिए रक्तदान जरूर करना चाहिए। मैंने 18 साल की उम्र में रक्तदान करना शुरू किया। रविवार को छठी बार रक्तदान किया। इस मुहिम में युवाओं को आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए।
- सुमित, माता दरवाजा।
रक्तदान महादान है। दान किए जाने वाले रक्त का कोई विकल्प नहीं है। यह केवल मनुष्य शरीर में ही होता है। यह गुप्तदान जीवन बचाता है। इसलिए पिछले 32 साल से रक्तदान कर रहा हूं। रविवार को 127वीं बार रक्तदान करने के लिए मंच पर सम्मानित किया गया।
- सुरेंद्र सिंह, मकडौली कलां।
वर्ष 1968 में शुरू की रक्तदान मुहिम अब तक जारी है। पहली बार सेना शिविर में रक्तदान किया था। पहली बार रक्तदान किया तब झिझक व भ्रांतियां थी। अब लोग समझने लगे हैं। खुद रविवार को 13वीं बार रक्तदान कर सम्मानित हुआ। लोगों को भी समझा रहा हूं।
- गोवर्धन, मकडौली कलां।
रेडक्रास सोसायटी में अकाउंटेंट हूं। वर्ष 1983 में पहली बार कालेज समय में रक्तदान किया था। सोसायटी में कार्यभार संभालने के बाद से अब तक 89वीं बार रक्तदान कर चुका हूं। अपनी पत्नी को जागरूक कर उसे भी रक्तदाता बनाया। अब वह भी रक्तदान में आगे रहती है।
- राज कुमार मोर, सेक्टर चार।
कानून की पढ़ाई कर रहा हूं। दूसरों का जीवन बचाने की सोच के साथ रक्तदान कर रहा हूं। रविवार को चौथी बार रक्तदान किया। मेरा ग्रुप ए-निगेटिव है। यह रेयर ब्लड ग्रुप है। इसकी अक्सर शार्टेज रहती है। ऐसे ब्लड ग्रुप वालों को रक्तदान करते रहना चाहिए।
- जीवेश सैनी, सैनीपुरा।
रक्तदान महादान है। यह आपात स्थिति में दूसरों को जीवन दे सकता है। रविवार को दूसरी बार रक्तदान का मौका मिला। ओ-पॉजिटिव ग्रुप किसी को भी जीवन दे सकता है। ऐसे ग्रुप वाले लोगों को रक्तदान में आगे रहना चाहिए। दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए।
- गौरव सैनी, सैनीपुरा।
मैंने पहली बार 1995 में रक्तदान किया था। दोस्त के परिवार में किसी को खून की जरूरत थी। मेरे दोस्त लेफ्टिनेंट कुलदीप राठी की शहादत पर लगे शिविर से रक्तदान की प्रेरणा मिली। इसके बाद से 122वीं बार रक्तदान कर चुका हूं। इसमें प्लेटलेट्स भी शामिल हैं।
- सुंदर जेटली, सुभाष नगर।
रेडक्रास सोसायटी में चालक की नौकरी मिली। इसके बाद महम शुगर मिल में पहली बार रक्तदान किया। यहां कुछ लोग शिविर का विरोध कर रहे थे। मेरे रकतदान करने के बाद सब कतार में आ गए। इसके बाद से 109 बार रक्तदान कर चुका हूं। लोगों को भी प्रेरित कर रहा हूं।
- दारा सिंह, पुरानी सब्डी मंडी।
औद्योगिक इलाके में चाय की दुकान चलाता हूं। रविवार को 19वीं बार रक्तदान किया। पीजीआई में पैर के आपरेशन के दौरान सिक्ख बुजुर्ग को रक्तदान करते देखा तो खुद रक्तदान करने का निर्णय लिया।
- प्रमोद कुमार, माड़ौदी।
कोरोना महामारी ने चारों तरफ कहर मचा रखा है। यह मुश्किल समय है। इस समय बीमारी की परवाह न करके लोग रक्तदान को आगे आएं। महामारी के कारण पीजीआई में भी रक्त कमी बन गई है। इस मुश्किल समय में बीमारी से लड़ने व जीत के सभी सहयोगी बनें। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
- मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम।
रक्तदान महादान यूं ही नहीं है। यह न केवल आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकता है, बल्कि भाईचारा बनाए रखने का भी संदेश देता है। दान किया रक्त जात-पात या धर्म का भेद नहीं देखता है। यह केवल जरूरतमंद की जान बचाता है। इसका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए सभी को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
- नवीन जैन, समाज सेवी एवं पूर्व प्रधान, वैश्य सोसायटी।
शिविर में अमर उजाला के साथ रेडी टू हेल्प, आपके साथ संस्था, शर्माजी दीमक वाले, पठानिया स्कूल, पीजीआई ब्लड बैंक, मां दानो देवी धर्मार्थ ट्रस्ट, रेडक्रास, इंडियन रेडक्रास ब्लड बैंक दिल्ली के सदस्यो ने सहयोग दिया। इस मौके पर जिला रेडक्रास सचिव देवेंद्र चहल, कवि वीरेंद्र मधुर, प्रो. आनंद शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय जेवलिन खिलाड़ी गुलशन शर्मा, प्रेम सिंह सैनी, मंजुल पालीवाल, रघुवीर सिंह, जिले सिंह, सतबीर तोदवाल, कृष्ण सिंह सैनी कोच, नवनीत, सतबीर कोच, मुकेश बागड़ी, प्रवीण तोंदवाल, संदीप खत्री, अनूप सिंह, सरदार रुपिंदर सिंह, शशांक सैनी, सुनील सैनी, नरेश कपूर, मोहित दलाल, राजेंद्र सिंह, ईश्वर रोझला, आदेश सैनी, दिलबाग सिंह, रजनीश कुहाड़, नवीन गिरणू, शमशेर सिंह मौजूद रहे।