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नगर निगम की किराए की दुकानों की रजिस्ट्री कराने का मामला

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फ्लैग : नगर निगम की दुकानों की रजिस्ट्री किरायेदारों के नाम करने का मामला
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हेडिंग : 20 साल की गणना कबसे, पत्र लिखकर पूछेंगे आयुक्त
: व्यापारी मिले डीटीपी से, आयुक्त पत्र लिखकर पूछेंगे निदेशक से
: शहर में 250 के करीब निगम की दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
प्रदेश सरकार की ओर से नगर निगम व नगर सुधार मंडल की किराये पर चल रही दुकानों को किरायेदार के नाम रजिस्ट्री कराने की पॉलिसी में कई पेंच फंस गए हैं। पॉलिसी में यह स्पष्ट नहीं है कि दो मंजिला दुकानों में रजिस्ट्री अलग-अलग होगी या नहीं। 20 साल की अवधि कब से मानी जाए और दुकानों की जमा सिक्योरिटी राशि निगम व्यापारियों को वापस देगा या नहीं। मामले को लेकर व्यापारी सोमवार को निगम अधिकारियों से मिले। अधिकारियों ने शहरी निकाय विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही।
शहर में निगम की 250 के करीब दुकानें हैं, जो लंबे समय से लीज या किराये पर व्यापारियों को दी हुई हैं। इनमें अकेले पालिका बाजार में 127 दुकानें हैं। जबकि हिसार रोड, पुरानी सब्जी मंडी, इंदिरा मार्केट, पुराना बस स्टैंड, कच्चा बेरी रोड, गांधी कैंप, शिवाजी कॉलोनी, झज्जर चुंगी व दिल्ली रोड पर भी दुकानें हैं। रोहतक के व्यापारियों ने स्थानीय विधायक एवं सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के माध्यम से सरकार से मांग की थी कि उक्त दुकानों का किरायेदार व्यापारियों को मालिक बनाया जाए। सीएम मनोहर लाल खट्टर की सहमति के बाद अप्रैल में शहरी निकाय विभाग ने योजना को मंजूरी दे दी और निगम को पत्र लिखकर कलेक्टर रेट पर दुकानों की रजिस्ट्री व्यापारियों के नाम कराने की हिदायत दी। अब पॉलिसी पढ़कर अधिकारी असमंजस में हैं। क्योकि कई नियम अभी इसमें स्पष्ट नहीं हैं।
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निगम अधिकारियों से मिले व्यापारी, डीटीपी बोले निदेशक को लिखा जाएगा पत्र
सोमवार को पालिका बाजार के प्रधान गुलशन निझावन व व्यापारी नेता सोम मलिक निगम कार्यालय पहुंचे और डीटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय से पॉलिसी के बारे में पूछा। डीटीपी ने कहा कि कई बिंदुओं पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। शहरी निकाय विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर पूछा जाएगा।
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