करिश्मा रंगा
रोहतक। एमडीयू में मैनेजमेंट साइंसेज एंड कॉमर्स क्षेत्र में किए गए एक शोध ने महिला उद्यमिता की बदलती तस्वीर सामने रखी है। अध्ययन के अनुसार, प्रदेश में 89.5 फीसदी महिलाएं नौकरी के बजाय खुद का व्यवसाय कर रही हैं। यह रुझान आत्मनिर्भरता व सशक्तीकरण का संकेत देता है लेकिन इसके साथ कई व्यावहारिक बाधाएं भी सामने आ रही हैं।
रोहतक के मदीना गांव निवासी पूजा ने 440 महिला उद्यमियों पर किए में अध्ययन में पाया कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का सकारात्मक प्रभाव महिलाओं के व्यावसायिक प्रदर्शन पर दिख रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फंडिंग की कमी उतनी बड़ी समस्या नहीं है जितनी जागरूकता और सही मार्गदर्शन की। उनका यह शोध 29 अप्रैल 2026 को पूरा हो चुका है।
अध्ययन के अनुसार, केवल 10.5 फीसदी महिलाओं को व्यवसाय विरासत में मिला है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता और जोखिम उठाने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है। 26 से 35 आयु वर्ग की महिलाएं बिना विरासत खुद पहचान बना रही हैं।
36-45 आयु वर्ग की महिलाएं भी बड़ी संख्या में व्यवसाय कर रही हैं। यह संकेत है कि उद्यमिता अब महिलाओं के लिए एक स्थायी कॅरिअर का विकल्प बनती जा रही है। संवाद
नए स्टार्टअप्स बढ़े, टिकाव अब भी चुनौती
करीब 64.5 प्रतिशत महिला उद्यमियों के व्यवसाय पांच वर्ष से कम पुराने हैं। लंबे समय तक व्यवसाय को स्थिर बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकांश महिला उद्यमी छोटे स्तर पर ही काम कर रही हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं अकेले या सीमित कर्मचारियों के साथ व्यवसाय कर रही हैं। करीब 66 फीसदी कारोबार स्थानीय बाजार तक सीमित हैं जिससे उनके विस्तार की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।
संसाधनों और योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी विस्तार में आ रही बाधा
शोध के अनुसार, महिलाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या उपलब्ध संसाधनों और योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी है। कई महिलाएं आज भी व्यक्तिगत बचत या परिवार की मदद पर निर्भर हैं। वहीं, सरकारी योजनाएं और बैंकिंग सुविधाएं उनके लिए उपलब्ध हैं।