पीजीआईएमएस के एआरटी सेंटर का सूरत-ए-हाल
फ्लैग : सामान्य दवा तो दूर डब्ल्यूएचओ की ओर से अत्यावश्यक घोषित एनवीपी सिरप भी नहीं
हैडिंग : एचआईवी पॉजिटिव की डिलीवरी के दौरान नवजात के संक्रमित होने का खतरा
- कभी सीडी फोर जांच मशीन का सामान भी उपलब्ध नहीं, मरीजों को टीबी की दवा भी नहीं मिलती
- साक्षात्कार में एचआईवी पॉजिटिव से भेदभाव के बाद अब नवजातों को दवा नहीं
संजय कुमार
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में सामान्य दवा तो दूर डब्ल्यूएचओ की ओर से अत्यावश्यक दवाओं में शामिल एनवीपी सिरप भी नदारद है। जबकि इस दवा को एचआईवी पॉजिटिव महिला की डिलीवरी के बाद उसके बच्चे को पिलाया जाता है। इस दवा को पिलाने से बच्चे में एचआईवी संक्रमण का खतरा लगभग टल जाता है। अब इस दवा को खरीदने के लिए पीड़ितों को दवा बाजार में धक्के खाने पड़ रहे हैं। बाजार में इसकी कमी के चलते समस्या बढ़ गई है।
एचआईवी ग्रस्त मरीजों ने बताया कि एक सप्ताह से अधिक समय बीत गया है और प्रदेश भर के सरकारी अस्पताल के स्टॉक में नेविरेपीन सिरप तक उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में पीड़ित को स्वयं बाजार में धक्के खाने पड़ रहे हैं, लेकिन दवा नहीं मिल पा रही है। इसके लिए दिल्ली तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यदि किसी को दवा मिलती है तो आसपास के अन्य जरूरतमंदों का काम चलाया जाता है। लेकिन सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेकर दवाओं का इंतजाम कराना चाहिए, क्योंकि दवा के अभाव में कई बच्चे एचआईवी पॉजिटिव हो जाएंगे।
पीड़ितों ने रोष जताते हुए कहा कि एआरटी सेंटर में कभी सीडी फोर मशीन का सामान नहीं होता है तो कभी टीबी की दवा समाप्त हो जाती है। मंगलवार को सीडी फोर मशीन एक बार फिर खराब हो गई है, अब इस जांच के बिना डॉक्टर मरीज की डोज तय नहीं कर पाएंगे। पीड़ितों ने रोष जताते हुए कहा कि हाल ही में एआरटी सेंटर में काउंसिलर, लैब तकनीशियन व स्टाफ नर्स की पोस्टों पर भर्ती की गई, इसमें भी पॉजिटिव पब्लिक के साथ भेदभाव किया गया। सरकार एचआईवी पॉजिटिव लोगों के लिए सारे इंतजाम करने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं है। पीड़ितों ने दावा करते हुए कहा कि एनवीपी सिरप प्रदेश भर के अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है।
क्या है दवा का कार्य
एचआईवी पॉजिटिव की डिलीवरी के बाद नवजात को नेविरेपीन सिरप पिलाया जाता है। इससे बच्चे को एचआईवी संक्रमण से बचाया जाता है। बच्चे के नौ माह के बाद उसका एचआईवी टेस्ट किया जाता है, यदि इसमें बच्चा पॉजिटिव आता है तो उसका पूरा उपचार आगे चलता है। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो अधिकांश बच्चों को इस दवा के पिलाने से संक्रमित होने से बचा लिया जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि डिलीवरी के दौरान कई बार बच्चे के मुंह में पानी चला जाता है, इससे उसे मां से एचआईवी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। इस खतरे को टालने के लिए यह दवा पिलाई जाती है।
बोले अधिकारी
एचआईवी संक्रमित महिला की डिलीवरी के बाद जन्म लेने वाले बच्चे को नेविरेपीन सिरप पिलाया जाता है। यह 60 एमएल की दवा बाजार में लगभग 300 रुपये की मिलती है। इसका निर्माण कम होने के चलते यह बाजार में काफी कम है, इसलिए समस्या हो सकती है। सरकारी अस्पतालों में दवा के बारे में जानकारी नहीं है।
- मंदीप मान, ड्रग कंट्रोलर अधिकारी
एआरटी सेंटर में मशीन व दवा की कमी की जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबंधित विभाग से बात करेंगे और जल्द ही मरीजों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. एमसी गुप्ता, डीन, पीजीआईएमएस