गांवों में चेकिंग से डरती है बिजली निगम की टीमें
तीन से 62 करोड़ तक के बकायेदार गांवों में लंबे समय से नहीं गई टीम, विरोध व हाथापाई के पैदा होते हैं हालात
- शासन के दबाव के चलते गांवों को फ्रेंचाइजी पर देने का फैसला
- फ्रेंचाइजी को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बिजली निगम को देहात क्षेत्रों में चेकिंग करने के नाम पर डर लगता है। जब भी टीम चेकिंग करने गांवों में जाती है, पुरजोर विरोध हो जाता है। कभी हाथापाई की स्थिति पैदा हो जाती है तो कभी गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगते हैं। अफसोस की बात है कि गांवों में हुए विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों को बिजली विभाग दस्तावेजों में दर्ज नहीं करता है। इसकी वजह यदि लिखा पढ़ी में मामला आ जाएगा तो कार्रवाई करनी पड़ेगी। जिससे विवाद के हालात और बढ़ सकते हैं। यही नहीं, रोहतक जिले के एक दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जहां टीमें सालों से चेकिंग करने ही नहीं बल्कि बकाया वसूली करने तक नहीं गई हैं जबकि गांवों पर 62 से तीन करोड़ रुपये तक बकाया हैं।
बिजली निगम में बिजली चोरी रोकने के लिए टीमें बनी हुई हैं। बिजली चोरों की धरपकड़ के लिए विजलेंस विभाग भी है, जो चोरी पकड़ते ही रिपोर्ट दर्ज करवाता है। निगम का यह अमला उन इलाकों के लिए नजर आता है, जहां बिजली चोरी नाम मात्र की है। जहां बेधड़क बिजली की चोरी हो रही है, वहां विजलेंस विभाग की टीम धरपकड़ करने के लिए जाती नहीं दिखती। ऐसा हम नहीं कर रहे बल्कि निगम के ही आंकड़े बताते हैं। देहात के इलाकों में इतने बड़े स्तर पर बिजली चोरी हो रही है, जिसका सहज अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। बावजूद इसके न कभी विजलेंस की टीमें धरपकड़ करने के लिए जाती हैं और न चेकिंग टीम। इसका साक्षात परिणाम यह है कि रोहतक के करीब दो दर्जन गांव ऐसे हैं, जहां सालों से विभागीय चेकिंग टीम नहीं गई है। हां, यह जरूर हो सकता है कि दस्तावेज में खानापूर्ति कर दी हो। निगम के अधिकारी बताते हैं कि गांवों में चेकिंग करने के लिए कोई जाना नहीं चाहता है क्योंकि टीम के पहुंचते ही ग्रामीण एकजुट होकर विरोध कर देते हैं। हाथापाई के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पैदा हो जाती है। टीम को गांव से निकलने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
इंसेट
फ्रैंचाइजी पर गांवों को देने जा रहा निगम
देहात में बिजली चोरी रोकने के लिए निगम दो फीडर को फ्रेंचाइजी (ठेका) पर देेने जा रहा है। फ्रेंचाइजी को प्रत्येक गांव के तारों की देखरेख, मैंटीनेंस करने पर 45 हजार रुपये हर माह मिलेंगे। लाइन लॉस कम होने पर 20 फीसदी प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। विभाग के अनुसार, देहात फीडरों से पोषित गांवों में लाइन लॉस 85 से 97 फीसदी है। कुछ गांवों में 70-85 फीसदी है। इससे निगम को हर माह करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
इन गांवों में काफी समय से नहीं गई टीमें
किलोई, निंदाना, ढिकोली, भाग बड़ौदा, इस्माइला, छारा, वैराणा, कंसाणा, आसन, खिड़वाड़ी।
कई करोड़ रुपये के बकायेदार गांव
नौ गांव ऐसे हैं, जो बिजली निगम के करोड़ों रुपये के बकायेदार हैं। इन गांवों से फिलहाल विभाग को वसूली की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। बिजली की सप्लाई बाधित होने पर विरोध भी इन्हीं गांवों के लोग पुरजोर तरीके से करते हैं। रिकॉर्ड के अनुसार गांव किलोई 62.71, खिड़वाड़ी 10.45 करोड़, सांघी 5.71 करोड़, वैराणा 6.11 करोड़, बोहर 3.01 करोड़, आसन 1.05 करोड़, गढ़ी सांपला 3.75 करोड़, भाग बड़ौदा 2.50 करोड़ और छारा 1.17 करोड़ रुपये के बकायेदार हैं।
करोड़ों रुपये के बकायेदार गांवों में वसूली के लिए निगम जागरूकता के प्रयास कर रहा है ताकि लोग प्रेरित होकर किसी भी तरह से बिल का भुगतान करना शुरू कर दें। हां, यह बात सही है कि गांवों में चेकिंग करने के नाम से टीम कतराती है क्योंकि विवाद के साथ-साथ अभद्रता कर दी जाती है। अब निगम ने देहातों के फीड़रों को फ्रेंचाइजी पर देने का फैसला लिया है। यदि कोई आएगा तो उसे जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।
- एसके बंसल, एसई, बिजली निगम