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कॉपियां बदलकर बी फार्मेसी में पास कराने के खेल का भंडाफोड़

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कॉपियां बदलकर बी फार्मेसी में पास कराने के खेल का भंडाफोड़
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पुलिस ने पीजीआई की बी फार्मेसी की परीक्षा में कॉपी बदलकर पास करवाने के खेल का भंडाफोड़ किया है। स्पेशल टीम ने सेक्टर-1 स्थित एक मकान में छापा मारकर दो आरोपियों को दबोच लिया है। आरोपियों से करीब 346 खाली और 31 हल की हुईं उत्तर पुस्तिकाओं को बरामद किया गया है। ये उत्तरपुस्तिकाएं पीजीआई से चोरी की गई हैं। हल करने के बाद आरोपी इन्हें दोबारा पीजीआई में रखने की तैयारी में थे। दोनों आरोपियों को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया, यहां से उन्हें सात दिन के रिमांड पर लिया गया।

मौके से फरार एक अन्य आरोपी देर रात पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपियों ने खुलासा किया है कि इस फर्जीवाड़े में हेल्थ विवि के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। पकड़ में आया एक आरोपी पीजीआई से सस्पेंड कर्मचारी है। वहीं, हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। टीम को दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुति करनी होगी।
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पुलिस की एंटी व्हीकल थैफ्ट एंड डिटेक्शन टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज वर्मा ने बताया कि रात को एसआई अशोक कुमार टीम के साथ दिल्ली बाईपास पर गश्त कर रहे थे। सूचना मिली कि आदर्श नगर निवासी नीरज और मदीना का विकास उर्फ ढिल्लू अपने साथियों के साथ पीजीआई से खाली उत्तर पुस्तिका चोरी करके लाए हैं। आरोपी पीजीआई की बी फार्मेसी के कंपार्टमेंट परीक्षा में विद्यार्थियों को पास कराने के लिए यह साजिश रच रहे हैं।

नीरज के सेक्टर एक स्थित किराए के मकान में कॉपियों को हल किया जा रहा है। पुलिस को देखकर नीरज के घर में मौजूद तीन-चार युवक तो मौके से फरार हो गए लेकिन दो आरोपी हत्थे चढ़ गए। आरोपियों की पहचान थुराना निवासी नीरज और घसौला निवासी हाल आदर्श नगर के जसवंत उर्फ जस्मू के रूप में हुई। पुलिस को नीरज के बैग से पीजीआई की 180 और जसवंत के बैग से 166 खाली उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं।

इसके साथ 31 कॉपियों को हल किया जा चुका था। जसवंत ने खुलासा किया कि पूरा खेल पीजीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से भागे विकास उर्फ ढिल्लू को भी देर रात हिरासत में ले लिया। रविवार को उसकी गिरफ्तारी दिखाई जाएगी।

पास कराने के नाम पर लेते थे 60-70 हजार रुपये
जसवंत ने खुलासा किया है कि हेल्थ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से मिलीभगत करके बी फार्मेसी की उत्तरपुस्तिकाएं चोरी करता था। इसके बाद नीरज अपने जाल में फंसाए गए अभ्यर्थियों के नाम से पेपर को हल करवाता था। हल कापियों को जसवंत पीजीआई में दोबारा जमा कर देता था।

विकास ग्राहकों को फंसाकर नीरज से मिलवाता था। इसके बाद लेनदेन की बात होती थी। एक पेपर में पास कराने के नाम पर 60 से 70 हजार रुपये लिए जाते थे। कभी-कभी यह रकम एक से डेढ़ लाख तक पहुंच जाती थी। नीरज ने बताया कि वह प्रत्येक पेपर के पीजीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों को 25-25 हजार रुपये देता था।

तीन माह पहले जेल से आया है जसवंत
पीजीआई में सेंधमारी करने वाला जसवंत बहुत शातिर है। वह कुछ समय पहले पीजीआई में गार्ड के पद पर तैनात था। पीजीआई से उत्तर पुस्तिका चोरी करने के एक मामले में पहले भी जेल जा चुका है। उसे निलंबित कर दिया गया था। जसवंत तीन माह पहले ही जेल से बाहर आया है। आरोपी के संबंध पीजीआई के वरिष्ठ अधिकारियों तक हैं। उन्हीं से मिलीभगत करके जसवंत काफी समय से फर्जीवाड़ा कर रहा था।

हत्या प्रयास में वांछित है विकास
आरोपी विकास कुछ समय पहले प्रदेश के एक बड़े गिरोह से जुड़ा था। आरोपी के खिलाफ पहले भी हत्या प्रयास और एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज है। नीरज कुछ दिन पहले ही जसवंत के संपर्क में आया था। उसके पिता का देहांत हो चुका है। आरोपी ने खुद को बी फार्मेसी का छात्र बताया है। फिलहाल वह एक कंपनी में एमआर की नौकरी कर रहा था। रिमांड अवधि में आरोपियों से उनके ग्राहकों के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा रही है। साथ ही पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपियों का पता लगाया जा रहा है।

यूं करते थे उत्तर पुस्तिका में घपला
आरोपी पहले उत्तरपुस्तिका को हल करवाते थे। जसवंत हल हुई उत्तरपुस्तिका को पीजीआई में रखी असली उत्तरपुस्तिका में शामिल कर देता था। पहले वाली उत्तर पुस्तिका को निकाल लिया जाता था। परिणाम आने के बाद आरोपी ग्राहकों से शेष रकम लेते थे। आरोपियों ने करीब 100 अभ्यर्थियों से पास कराने के नाम पर रुपये ले रखे थे।
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वीसी ने बनाई जांच टीम, दो सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
मामले में पीजीआई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बी फार्मेसी की उत्तरपुस्तिकाएं सुरक्षित हैं। जनसंपर्क विभाग के प्रो. इंचार्ज डॉ. प्रशांत ने बताया कि वीसी डॉ. ओपी कालरा ने तीन डॉक्टरों की एक टीम डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. रोहताश यादव के नेतृत्व में गठित की है। टीम में शारीरिक रचना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कांता और फॉरेंसिंक विभाग से डॉ. लव शर्मा को शामिल किया गया। टीम को दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगर रिपोर्ट में कोई दोषी पाया जाता है तो विश्वविद्यालय सख्त कार्रवाई करेगा।


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