ब्लैक फंगस के इंजेक्शन आम मरीजों की पहुंच से बाहर है। वहीं, दूसरी तरफ दो निजी दवा कंपनियों के फील्ड मैनेजर ने 20 दिन में 250 से ज्यादा इंजेक्शन ब्लैक में बेचकर लाखों रुपये कमाए। आरोपी भिवानी निवासी डिंपल शर्मा व हिसार निवासी राहुल ने रिमांड के दौरान खुलासा किया है कि उन्होंने 314 रुपये का टीका 12 हजार तो 7800 रुपये का टीका 35 हजार रुपये तक में बेचा। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद स्टेट एसटीएफ ने बुधवार को आरोपियों को रोहतक की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रेवाड़ी जेल भेज दिया गया।
जांच अधिकारी एसटीएफ इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि उनको भनक लगी कि दो फार्मा कंपनी के कर्मचारी ब्लैक फंगस के टीके उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन इसके लिए कीमत चार गुणा से ज्यादा ले रहे हैं। तीन-चार दिन आरोपियों से डील के लिए बातचीत की। तय हुआ कि आरोपी 12 इंजेक्शन 1 लाख 44 हजार रुपये में उपलब्ध करवा देंगे। इसके लिए इंस्पेक्टर से आरोपियों ने 72 हजार रुपये एडवांस ऑनलाइन अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए। 23 मई को आरोपी रोहतक के हिसार रोड पर जब डिलिवरी करने आए तो एसटीएफ व स्थानीय ड्रग्स इंस्पेक्टर की टीम ने उन्हें 12 इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार कर लिया था। तभी से आरोपी दो दिन के रिमांड पर थे।
व्हाट्सएप ग्रुप में पूछते थे आरोपी, कहां कितना माल
जांच अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपी दवा कंपनियों में फील्ड मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। साथ ही 10 से 12 दूूसरी कंपनियों के कर्मचारियों के साथ व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े थे। ग्रुप में आरोपी मैसेज डालकर पूछते थे कि ब्लैक फंगस के टीके कहां मिल सकते हैं। दवा कंपनियों के कर्मचारियों को पता होता था कि किस शहर में किस मेडिकल स्टोर पर कितना माल सप्लाई किया था। माल का पता लगते ही सौदा तय करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इसके बाद आधी पेमेंट एडवांस ली जाती। फिर बताया जाता, कहां माल मिलेगा। बाकी पेमेंट डिलिवरी के समय ली जाती।
नोएडा से लेकर हिसार तक फैला जाल, रेड की सूचना लीक होने से बड़ी खेप नहीं मिली
आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि ब्लैक फंगस के टीके की कालाबाजारी का नेटवर्क यूपी के नोएडा से लेकर दिल्ली, दिल्ली एनसीआर से लेकर रोहतक, हिसार व दूसरे जिलों की तक फैला हुआ था। पूछताछ में जांच टीम को पता चला कि हिसार के एक मेडिकल स्टोर पर 100 से ज्यादा ब्लैक फंगस के टीके रखे हैं। जांच टीम ने 23 मई की रात को ही दबिश देने की बजाय अगले दिन सुबह मेडिकल स्टोर खुलने का इंतजार किया, लेकिन तब तक सूचना लीक हो चुकी थी। ऐसे में हिसार में माल बरामद नहीं हुआ।
शक न हो, इसलिए डालते थे तीन बैंक अकाउंट में पैसे
जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी ब्लैक फंगस के टीके ब्लैक में बेचकर राशि एक ही अकाउंट में नहीं डालते थे। शक न हो इसलिए अपने परिजन या रिश्तेदार के दो अकाउंट में भी पैसे डालते थे। अब जांच टीम अदालत की अनुमति से संबंधित बैंक अकाउंट की डिटेल निकलवाएगी।
रिमांड के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया है कि अब तक उन्होंने 20 दिन में 250 से ज्यादा ब्लैक फंगस के टीके ज्यादा रेट पर बेचे हैं। इसमें 314 रुपये का टीका 12 हजार तो 7800 रुपये का टीका 35 हजार रुपये तक में बेचा है। परिचित या रिश्तेदारों को कम रेट में टीके सप्लाई किए हैं। दो दिन के रिमांड के बाद आरोपियों को रोहतक की अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में रेवाड़ी जेल भेज दिया गया।
-सतीश देशवाल, जांच अधिकारी एवं इंस्पेक्टर एसटीएफ