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पांच मजदूरों की मौत के बाद भी प्रशासन नहीं चेता, ड्रम पर पन्नी बांध ट्रैफिक कंट्रोल का जुगाड़

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पांच मजदूरों की मौत के बाद भी प्रशासन नहीं चेता, ड्रम पर पन्नी बांध ट्रैफिक कंट्रोल का जुगाड़
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हिसार। जिंदल पुल पर मंगलवार देर रात डेढ़ बजे हुए हादसे के 20 घंटे बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। इस हादसे ने पांच लोगों की जान ले ली। ऐसे में प्रशासन को किसी और बड़े हादसेे का इंतजार है। प्रशासन द्वारा बुधवार को घटनास्थल पर स्टॉपर और ड्रमों के सहारे प्लास्टिक की पन्नी बांधकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में पुल के ऊपर से पूरा दिन ट्रैफिक भी वन-वे रहा, जिस कारण पुल पर जाम जैसी स्थिति भी रही।
दूसरी ओर मारे गए पांच मजदूरों के मामले में भी प्रशासन लीपापोती वाली कार्रवाई अमल में ला रहा है। इस मामले में अधिकतम दो साल तक की सजा के एक्ट के तहत अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं, घायल कार चालक मनोज उर्फ मोगली हिस्ट्रीशीटर है और हत्या मामले में अदालत द्वारा दोषी करार दिया जा चुका है। वह कई अन्य मामलों में भी वांछित है और फरार चल रहा था।
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हादसे से नहीं लिया सबक
हादसे के बाद भी प्रशासन या सड़क ठेेकेदार ने कोई सबक नहीं लिया। बुधवार को पूरा दिन पुल पर चढ़ने से पहले ऐसा कोई चेतावनी बोर्ड, सचेतक या रिफ्लेक्टर नहीं लगाया गया, जिससे वाहन चालकों को पुल पर मास्टिक करने का पता लगे। दिनभर वाहन यहां दौड़ते रहे। हालांकि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां निर्माण सामग्री अभी पड़ी है और लीपापोती के लिए स्टॉपर व ड्रमों के सहारे एक प्लास्टिक की पन्नी अवश्य बांध दी गई है। इसके चलते पुल का करीब 7-8 फुट का हिस्सा बंद है। इससे वाहन चालकों को आने-जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दूर तक बिखरा मलबा कर हरा हादसे की भयानकता बयां
हादसा इतना भयानक था कि इसमें कार के परखचे उड़ गए। कार का मलबा और निर्माण सामग्री के टुकड़े पुल से नीचे करीब 70-80 मीटर तक फैले हुए थे। पुल के ऊपर तो तेल बिखरा ही हुआ था, साथ ही पुल के नीचे भी तेल ही तेल बिखरा पड़ा था। गाड़ी न केवल मजदूरों को अपनी चपेट में लेती हुई हवा में लहराती नीचे गिरी, बल्कि रास्ते में आने वाले बिजली के तारों को भी तोड़ती हुई नीचे गिरी। वहीं पर दो-तीन खोखे भी थे। रात को ये सब बंद थे, जबकि दिन में इन पर भीड़-भाड़ रहती है।
कार से मिली दो नंबर प्लेट
हिस्ट्रीशीटर मनोज उर्फ मोगली की आई-20 गाड़ी से पुलिस को दो नंबर प्लेट बरामद हुई थीं। इसके अलावा इस गाड़ी से 74 हजार रुपये भी पुलिस ने बरामद किए थे। पुल के ऊपर भिड़ी गाड़ी आरटिगा पर आगे की ओर हरियाणा सरकार लिखा था। यह गाड़ी सेक्टर-15ए निवासी अनिल मोहन सहारण के नाम पर है। यह आईएएस आनंद मोहन सहारण का भाई बताया जा रहा है।
अधिकारी देते रहे आश्वासन
मजदूरी करके अपना पेट पालने के लिए हिसार आए पांच मजदूरों की मौत को मामले में प्रशासन लीपापोती करता नजर आया। एक तरफ तो जहां पुलिस ने पूरे मामले मेेें अज्ञात के खिलाफ तीन मामूली धाराओं के तहत केस दर्ज किया, वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी मृतकों को मुआवजे के नाम पर कोरा आश्वासन देते नजर आए। पूरा प्रशासन इसी बात को लेकर कार्रवाई करता नजर आया कि कैसे भी करके ये लोग शव लेकर यहां से रवाना हो जाएं, जबकि मजदूरों ने मुआवजे की मांग को लेकर करीब पांच घंटे तक शवों को ले जाने से इनकार किए रखा।
परिजन बोले- पांच शव व आश्वासन लेकर गांव में कैसे जाएं
घायलों और मारे गए परिजनों से मिलने के लिए एसडीएम परमजीत सिंह चहल बुधवार दोपहर करीब 11 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचे। एसडीएम ने उनको आश्वासन दिया कि उनकी प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद की जाएगी व उचित मुआवजा दिलवाया जाएगा। इसके अलावा घायलों का इलाज भी सही से करवाया जाएगा। शवों के पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तक परिजन शव गृह के बाहर हंगामा करते रहे। उनके अनुसार हादसे में पांच जवान लोग मारे गए हैं। मारे गए सभी विवाहित हैं और इनके दो से तीन बच्चे भी हैं। अब वो अपने पांच साथियों के शव लेकर प्रशासन के कोरे आश्वासन के साथ घर पर कैसे जाएं। हंगामे की सूचना मिलने के बाद लेबर इंस्पेक्टर सतबीर सिंह व सिटी थाना प्रभारी मनदीप सांगवान मौके पर पहुंचे व उनको उचित कार्रवाई करने का भरोसा देकर बिहार के लिए रवाना किया।
हादसे में इनकी हुई मौत और गई जान
बिहार के खगड़िया जिला के पीर नागरा गांव वासी 28 वर्षीय नीरज व 35 वर्षीय विकास, बिहार के सहरसा जिला के गांव बाडा निवासी 25 वर्षीय अवधेश, 26 वर्षीय सुभाष व 24 वर्षीय चंद्र किशोर मारे गए हैं। इनके अलावा सतेन, शंकर, विकास, गोविंदा, भूषण व मनोज उर्फ मोगली इस हादसे में घायल हुए हैं।
कार चालक हत्या केस में सजा होल्ड अपराधी
घटना में आई 20 कार चला रहा मनोज उर्फ मोगली हत्या केस में सजा होल्ड अपराधी है। इसके खिलाफ और भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें यह फरार चल रहा है। अपराधी मनोज व उसके 23 साथियों को चैनत गांव के संदीप की हत्या केस में 14 अगस्त को एडीजे डॉ. पंकज की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मनोज उस दिन कोर्ट से फरार हो गया था और अभी तक फरार चल रहा था। घटना की रात वह अर्बन एस्टेेट वाले अपने घर से दिल्ली की तरफ जा रहा था। इस घटना में मनोज का एक पैर टूट गया है और उसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने पूरे अस्पताल प्रशासन को अपने घेरे में लिया हुआ है। मनोज की हालत ठीक होते ही पुलिस उसे गिरफ्तार करेगी।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस और ये है अधिकतम सजा
279- लापरवाही से गाड़ी चलाना, दोषी को अधिकतम छह माह की सजा।
304ए- गाड़ी से चोट मारना, दोषी को दो साल की कैद, जमानती अपराध।
337- जीवन को खतरे में डालने वाला जख्म देना, दोषी को अधिकतम छह माह की सजा, जमानती अपराध।
वर्जन
हादसे में पूरी तरह से ठेकेदार की लापरवाही रही है। हमने उसको पहले ही बता दिया था कि काम करने वालों को ड्रेस पहननी होगी और किसी को ऊपर नहीं सोने देना है। इसके अलावा पुल के ऊपर निर्माण सामग्री स्टोर नहीं करनी है। इसके बावजूद लापरवाही बरती गई, जिस कारण हादसा हुआ। ठेकेदार ने कल रात को ही सामग्री पुल पर उतारी थी। अब उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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-शमशेर सिंह, ट्रैफिक इंचार्ज, हिसार।
वर्जन
फिलहाल मृतकों और घायलों के मैटर को देख रहा था, जिस कारण मौके पर नहीं जा पाया। वहां वाहन चालकों को सूचना के लिए क्या इंतजाम किए हैं, मालूम नहीं। पता करके इंतजाम कराए जाएंगे, ताकि फिर कोई हादसा न हो। मुआवजे के लिए विभागों के नियमानुसार कैलकुलेशन की जाएगी, जिसमें एक माह का समय भी लग सकता है। फिलहाल ठेकेदार द्वारा मृतकों के परिजनों को 75-75 हजार रुपये और घायलों को 5-5 हजार रुपये दिए गए हैं।
-परमजीत सिंह चहल, एसडीएम, हिसार
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