अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। 28 साल पहले हुए महम कांड में इनेलो नेता अभय चौटाला सहित सात लोगों को एडीजे फखरुद्दीन की अदालत द्वारा भेजे नोटिस का जवाब नहीं आ सका। इसके चलते अदालत ने शुक्रवार को दोबारा चौटाला सहित छह आरोपियों को नए पत्ते पर नोटिस भेजे हैं। एक आरोपी डीएसपी सुखराज राणा का नाम याचिका से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि उनका देहांत हो चुका है। अब अदालत ने मामले की अगली तारीख 26 अक्तूबर तय की है।
एडवोकेट सुरजीत सांगवान ने बताया कि माडल टाउन निवासी रामफल मूलरूप से भिवानी जिले के गांव खरक के निवासी हैं। उन्हाेंने महम अदालत में याचिका दायर की थी कि उसके भाई हरिसिंह की 1990 में महम कांड के दौरान हुई हिंसा में मौत हो गई थी। आरोप है कि उसके भाई की मौत के लिए इनेलो नेता अभय चौटाला, हरियाणा के पूर्व डीजीपी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा और गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी व हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू और जिला फतेहाबाद के गांव गिल्ला खेड़ा के अजित सिंह जिम्मेदार हैं। महम अदालत में 28 साल पहले दर्ज केस में दोबारा जांच कराने की याचिका खारिज हो गई थी। इसके चलते रामफल ने एडीजे फखरुद्दीन की अदालत में अपील की थी। अपील को मंजूर करते हुए जुलाई में एडीजे कोर्ट ने चौटाला सहित सातों आरोपियों को पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा था। जवाब के लिए सात सितंबर की तारीख तय की गई। सांगवान ने बताया कि किसी भी आरोपी के दिए गए पत्ते पर नोटिस तामील नहीं हो सके। न ही कोर्ट में किसी आरोपी पक्ष की तरफ से जवाब आया। पता चला कि एक आरोपी भिवानी से डीएसपी रहे सुखराज राणा का तो देहांत हो चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ता के वकील ने ही उनका नाम आरोपियों की सूची से निकालने की अदालत से मांग की। अदालत ने उसे मंजूर कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता की तरफ से छह आरोपियों के नए पत्ते अदालत को बताए गए। अदालत ने 26 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करने के लिए नए सिरे से नोटिस भेजे हैं।
यह रहा मामला
फरवरी 1990 में महम विधानसभा से उपचुनाव में एक तरफ जहां पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला मैदान में थे, दूसरी तरफ मौजूदा कांग्रेसी विधायक आनंद सिंह दांगी पंचायती उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव के दौरान काफी तनावपूर्ण माहौल हो गया था। कई बूथों पर गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने आठ बूथों पर नए सिरे से पोलिंग कराने का फैसला किया। इसमें गांव बैंसी, चांदी, महम, भैणी महाराजपुर और खरैंटी के बूथ थे। पुनर्मतदान के दौरान हिंसा में 10 लोग मारे गए। इसमें रामफल का भाई हरिसिंह भी था। रामफल ने मामले के संबंध में महम थाने में हत्या का केस भी दर्ज कराया, लेकिन जांच नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके चलते उसने दोबारा याचिका दायर कर नए सिरे से जांच की मांग की हुई है।