पांच साल में पहली बार खुला मंत्री का मेयर के खिलाफ मुंह, बोले
मेयर ने कर्मचारियों को उकसाया, इस्तीफा दें
: डाबला बोलीं, मैंने किसी को नहीं उकसाया, सरकार निभाए राजधर्म
- मंत्री के बयान की राजनीतिक गलियारों में चर्चा, फर्नीचर घोटाले में मुंह नहीं खोलने वाले मंत्री का बयान नहीं हो रहा हजम
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कांग्रेसी मेयर रेनू डाबला का पांच साल का कार्यकाल एक माह 10 दिन बाद 30 जून को पूरा हो रहा है। प्रदेश के सहकारिता मंत्री एवं स्थानीय विधायक मनीष ग्रोवर ने राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद अब तक के कार्यकाल में पहली बार मेयर के खिलाफ बयान दिया है। इंद्रगढ़ में कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि मेयर रेनू डाबला सफाई कर्मियों को उकसा रही हैं, उन्हें शहर की प्रथम नागरिक होने के कारण पूरे शहर की चिंता करनी चाहिए। ऐसा न करने पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
बता दें कि नगर निगम ने 2014 में प्रस्ताव पास करके करीब 19 लाख का फर्नीचर खरीदा था। तर्क दिया गया था कि इस फर्नीचर को शहर के सभी 20 वार्डों के अंदर जन सुनवाई के लिए पार्षदों के कार्यालय या आवास पर रखा जाएगा। जनवरी 2015 में भाजपा पार्षदों ने शिकायत दी कि फर्नीचर निगम ने मार्केट से ज्यादा रेट पर खरीदा है। हंगामा होने पर मुख्यमंत्री ने भाजपा पार्षद अशोक खुराना, ममता रानी, सुशीला इंदौरा, पूनम किलोई, जयकिशन व अजय जैन टाटू की शिकायत पर विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने अपनी जांच में खुलासा किया था कि फर्नीचर खरीद मामले में अनियमितताएं बरती गई हैं। इसके लिए फर्नीचर खरीदने के लिए गठित कमेटी में शामिल मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, निगम अकाउंट आफिसर विकास व म्यूनिसिपल इंजीनियर जगदीश चंद्र उत्तरदायी हैं। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के आचरण पर सरकार फैसला ले, जबकि अधिकारियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए। यह सिफारिश विजिलेंस ने 2017 में की थी, लेकिन फाइल अब तक चंडीगढ़ शहरी निकाय विभाग के अंदर धूल फांक रही है।
एमई हो चुके हैं टायर, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं
फर्नीचर घोटाले से जुड़े नगर निगम के म्यूनिसिपल इंजीनियर जगदीश चंद रिटायर हो चुके हैं। उन्हें कई बार चंडीगढ़ बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया गया, लेकिन उनकी नौकरी के कार्यकाल में तीन साल बाद भी मामले का पटाक्षेप नहीं हो सका।
मंत्री के बयान से अचरज
मंत्री से मीडिया ने जब भी पूछा कि फर्नीचर घोटाले में कार्रवाई कब होगी, हर बार चंद लाइन में मंत्री जवाब देते थे कि कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन अब सफाई मामले में मंत्री का यह बयान कि मेयर कर्मचारियों को उकसा रही है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। इससे शहर के राजनीतिक गलियारों में अचरज महसूस हो रहा है।
- अशोक खुराना, भाजपा पार्षद एवं फर्नीचर घोटाले में शिकायतकर्ता
मैंने किसी को नहीं उकसाया, 9वें दिन गई धरने पर
सफाई कर्मियों की मांगों पर सरकार सहानुभूति विचार करे। वे तो हड़ताली कर्मचारियों की मांगों का कानून के दायरे में समर्थन करने गई थी, न ही उकसाने। मैंने तो वहां यह भी बोला कि सफाई न होने से लोग बीमार होंगे, बीमार होने वालों में उनके बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। सरकार और मंत्री अपना कर्त्तव्य निभाएं।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
पार्टी व नेताओं से दूर भाग रहे पार्षद
उधर, निगम चुनाव को लेकर शहर में सक्रियता जारी है। दावेदारों ने जगह-जगह अपने वार्डों में होर्डिंग लगाने शुरू कर दिए हैं। निगम की एक महिला पार्षद भाजपा से जुड़ी रही हैं। अब दोबारा फिर चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने अपने वार्ड में जगह-जगह न केवल होर्डिंग लगाने शुरू कर दिए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी प्रचार शुरू कर दिया है। होर्डिंग में भाजपा का चुनाव चिह्न या मंत्री का नाम व फोटो गायब है। जबकि पार्टी निगम चुनाव चिह्न पर लड़ती है। उधर, एक कांग्रेसी महिला पार्षद ने भी प्रचार शुरू कर दिया है। पोस्टर में उसने अपने पति व बेटे का फोटो साथ लगाया है। कांग्रेसी नेताओं का कहीं नाम या फोटो नहीं है।