अपनों का दर्द भूलकर बच्चों की जान बचाने में जुट गए तीमारदार और मरीज
- चरखी दादरी में बस हादसों में स्कूली बच्चों की मौत व घायल होने का मामला
- हादसे की सूचना पाते ही पीजीआई प्रशासन को भी कर दिया गया था अलर्ट
महबूब अली
रोहतक।
चरखी दादरी में बस हादसे में स्कूली बच्चों के घायल होने के बाद पीजीआई में उपचाराधीन मरीज व उनके तीमारदारों ने भी मिसाल कायम की। बच्चों की हालत देखते ही मरीजों से लेकर तीमारदार खुद का दर्द भूलकर डॉक्टरों के साथ मिलकर बच्चों को उपचार देने में जुट गए। हर किसी ने उनकी सराहना की है।
चरखी दादरी में स्कूली बस की टक्कर के बाद बच्चों की मौत व कई बच्चों के घायल होने की सूचना पाते ही पीजीआई प्रशासन में भी हड़कंप मच गया था। आनन-फानन में अधिकारियों के निर्देश पर पीजीआई प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया गया। ड्यूटी कर जा चुके चिकित्सक व फार्मेसिस्ट को भी वापस बुला दिया गया। जैसे ही घायल बच्चों को पीजीआई लाया गया तो चिकित्सक, फार्मेसिस्ट से लेकर यहां पर भर्ती मरीजों से लेकर तीमारदार भी घायल बच्चों को उपचार दिलाने में चिकित्सकों का सहयोग करते दिखाई दिए।
पानीपत निवासी रीतू अपनी मां का इलाज कराने के लिए यहां पर पहुंची थी। रीतू ने खुद कई बच्चों को उपचार दिलाने में सहयोग दिया। इसी तरह जींद निवासी नवीन खुद का उपचार कराने के लिए आया था। उसे हड्डी रोग से संबंधित शिकायत थी। मगर बच्चों को तड़पते देखकर वह खुद ही उपचार कराने में जुट गया। इसके अलावा रोहतक निवासी मनीष, रितिका ने भी घायल बच्चों को उपचार दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
अपनों को तलाशती रही निगाहें
जैसे ही अभिभावकों को बच्चों के सड़क हादसे में घायल होने की सूचना मिली तो वह तुरंत ही पीजीआई की तरफ दौड़ पड़े। चरखी दादरी की सुनीता तो अपने मासूम बच्चे के घायल होने के बाद बार-बार बिलख रही थी। हालांकि लोग महिला को शांत कर रहे थे। इसके अलावा भी कई परिजन अपने बच्चों को तलाशते नजर आए।
सहकारिता मंत्री ने भी जाना बच्चों का हाल
सड़क हादसे में बच्चों के घायल होने का पता चलने पर सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर पीजीआई के ट्रामा सेंटर में पहुंचे। जहां पर बच्चों का हाल जाना। यहीं नही चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को बच्चों को सही ढंग से उपचार देने को कहा। कहा कि जिसकी भी लापरवाही से हादसा हुआ है। जांच के बाद उ सके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
स्कूल से ही तेज गति से बस को चला रहा था चालक, बच्चों के पूछने पर बोला
टाकर लाग्गी तो मरै णा कोई सा बी
- स्कूली बच्चों ने पीजीआई में सुनाई आपबीती
- बार बार टोकने के बाद बस को धीमा नहीं कर रहा था चालक
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
अंकल हम बार-बार बस वाले अंकल को बस को धीमा चलाने को कह रहे थे। मगर वह बार-बार यहीं कह रहा था कि बस की टाकर लाग्गी तो मरै णा कोई सा बी। इसके बाद अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा गया तथा हम अस्पताल आ गए। यह कहना है चरखी दादरी में सड़क हादसे में घायल पांचवीं के छात्र नवीन का।
घायल छात्र इशांत ने कहा कि अंकल प्रतिदिन बस वाले अंकल तेजी से बस को चलाते थे। हर बार उन्हें बस को धीमी गति से चलाने को कहा जाता था। मगर नहीं मानते थे। आज भी बस को अंकल तेजी से चला रहे थे। बच्चों के बार बार कहने के बाद भी बस को धीमा नहीं किया। जिसके कारण यह हादसा हुआ।
नवीन ने बताया कि स्कू ल की छुट्टी के बाद से ही चालक बस को तेज गति से चला रहा था। कई बच्चों ने उसे बस को धीमा चलाने को कहा। मगर वह नहीं मान रहा था। हर बार कहता था कि कोई सा भी बस की टक्कर लगने से मरैगा णा। इसके बाद अचानक ही उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया तथा अब खुद को अस्पताल पाया।
बच्चों के उपचार दौरान गुल हुई बिजली, टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में हुआ उपचार
रोहतक। चरखी दादरी में सड़क हादसे के बाद पीजीआई प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया था। लेकिन उपचार के दौरान शाम करीब पांच बजे पीजीआई की बिजली आपूर्ति करीब पांच मिनट तक बाधित रही। जिसके कारण चिकित्सकों को टार्च व मोबाइल की रोशनी में उपचार करने को मजबूर होना पड़ा। बच्चों के परिजनों ने विभागीय अधिकारियों से मामले की शिकायत करने का दावा किया है।
कहीं सांपला में भी न हो जाए हादसा
रोहतक। सांपला बाईपास पर अंडरपास बनाने की घोषणा करीब एक साल पूर्व ही सीएम ने विकास रैली के दौरान की थी। मगर यहां पर अभी तक अंडरपास का निर्माण नहीं कराया गया। जबकि बाईपास पर अब तक सड़क हादसों में स्कूली बच्चों के अलावा अन्य की मौत हो चुकी है। लोगों ने जल्द से जल्द अंडरपास की मांग की है। कहा कि चरखी दादरी में भी सांपला जैसे हादसे की संभावना है।