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प्रथमा, कैप्टन अभिमन्यु, केएमपी

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अगले दो महीने में शुरू हो जाएगा केएमपी एक्सप्रेस-वे
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- वित्तमंत्री ने अमर उजाला के कार्यक्रम ‘प्रथमा’ के दौरान की घोषणा, बोले पिछली सरकार की नीति के वजह से अटका था निर्माण
- बोले एचएसआईआईडीसी को करना था निर्माण, लेकिन सरकार गलत नीतियों की वजह से करोड़ों के कर्ज में डूबी थी संस्था
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे अगले दो महीने में शुरू हो जाएगा। इसकी घोषणा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंगलवार को अमर उजाला के प्रथमा कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान की। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण एचएसआईआईडीसी को करना था, लेकिन पिछली सरकार की गलत नीतियों की वजह से एक्सप्रेस-वे का निर्माण पिछले 15 वर्ष से अटका था। सरकार ने अपने काम में पारदर्शिता लाते हुए एक्सप्रेस-वे की सभी अड़चनों को दूर किया और अब अगले दो महीने में इसे शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे का निर्माण कर रहे पूर्व कंसेसनर को पिछली सरकार ने 1300 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया था। भाजपा सरकार ने 1300 करोड़ की रकम को जीरो करने के साथ ही कांट्रेक्ट भी खत्म कर दिया। पूर्व कंसेसनर को एक रुपया भी नहीं दिया और 135 किलोमीटर लंबे केएमपी एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी हो गया। उन्होंने कहा कि अगले दो महीनों में केएमपी लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इससे पूरे दिल्ली-एनसीआर को लाभ होगा। कुंडली से गाजियाबाद और पलवल की कनेक्टिविटी होगी। इससे हरियाणा के करीब 80 हजार कॉमर्शियल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा और उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकेंगे।
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वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने एचएसआईआईडीसी पर बेतहाशा कर्ज का बोझ डाल दिया था। विभाग जमीन भी अधिग्रहीत नहीं कर सकता था। यहां तक कि अपने एस्टेट के अंतर्गत न्यूनतम डेवलपमेंट कराने के लिए भी एचएसआईआईडीसी को कर्ज लेना पड़ रहा था। सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था बनाते हुए इसे ठीक किया है। हाल ही में गुरुग्राम में पारदर्शी तरीके से 10 एकड़ के एक प्लॉट की बिक्री ऑक्शन के जरिए की गई, जिससे 14 सौ करोड़ रुपये मिले। जबकि पिछली सरकार में बगैर किसी प्रक्रिया के ही प्लॉट आवंटित किए जा रहे थे। छह हजार रुपये वर्ग गज की कीमत मे प्लाट को ऑक्शन प्रक्रिया के तहत 20 से 30 हजार रुपये प्रति वर्ग गज पर बेचा जा रहा है। पिछली सरकार किसानों की जमीन को निजी बिल्डरों के हाथों में पहुंचा रही थी। 10 हजार किसानों को अधिग्रहण का नोटिस दिया गया था, जिसे रोकते हुए सारे अधिग्रहण भाजपा सरकार में निरस्त किया गया है।
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