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घर के बाहर खेल रही दो वर्षीय बच्ची की बच्ची की नाले में गिरने से दर्दनाक मौत

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महम में नाले में गिरने से दो वर्षीय बच्ची की मौत
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- दो साल से खुला पड़ा है गंदा नाला, अधिकारी बोले-40 प्रतिशत हिस्सा रखना होता है खुला
- महम के फरमाणा चुंगी के पास हुई घटना, घर के बाहर खेल रही थी बच्ची

अमर उजाला ब्यूरो
महम/रोहतक।
महम की फरमाणा चुंगी के पास दो वर्षीय बच्ची की बुधवार को खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। क्षेत्रवासी बार-बार नाले को ढकने की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी न तो नगर पालिका ने सुनी और न ही पीडब्लूडी विभाग ने। बच्ची की मौत के बाद पीडब्लूडी विभाग के अधिकारी ने नियमों का हवाला देकर कहा कि नाले का 40 प्रतिशत हिस्सा खुला रखना होता है। ताकि समय पर सफाई हो सके।
महम की फरमाणा चुंगी के पास घर के बाहर खेल रही दो वर्षीय बच्ची का पैर फिसल गया और वह गंदे नाले में गिर पड़ी। बच्ची को नाले से निकालने के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो गई।
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मृतका के पिता संदीप ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी बेटी नेहा सुबह घर के बाहर खेल रही थी। जब बच्ची को घर लेने गए तो वहां नहीं मिली। बच्ची को तलाश करने के लिए पड़ोसियों से पूछताछ की गई। लेकिन बच्ची को कोई सुराग नहीं मिल सका। इसी दौरान घर के बाहर खुले पड़े नाले में बच्ची के कपडे़ नजर आए। उसके बाद नाले के अंदर जाकर देखा तो बच्ची के डूबने की पुष्टि हुई। बच्ची को नाले से बाहर निकाल कर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि गली के किनारे पर खुला नाला होने के कारण कई बार पशु भी चोटिल हो चुके थे। इसलिए नाले को ढकने के लिए नपा और पीडब्लूडी के उच्च अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी थी। लेकिन उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की लापरवाही के कारण बच्ची की मौत हुई है।

नपा और पीडब्लूडी की लापरवाही बन रही अभिशाप
नपा की जद में आने वाली सड़कों के किनारे गंदे पानी की निकासी के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से नालों का निर्माण किया था। तभी से इस नाले को खुला छोड़ दिया था। क्षेत्रवासियों ने इसका विरोध भी किया था, मगर किसी ने भी सुनवाई नहीं की। क्षेत्रवासियों ने नाले का ढकने की मांग की थी। इतना ही नहीं निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद पीडब्लयूडी और नपा ने इनकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। निर्माण कार्य हुए दो साल से भी अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक इन नालों को ढकने का काम पूरा नही हो पाया है। जिससे नाले कस्बा वासियों के लिए अभिशाप बने हुए हैं। खुले नालों में गिरने के कारण पशु भी चोटिल होते रहते हैं।
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नियमों के अनुसार ढके गए हैं नाले - एसडीओ
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अनिल कौशिक ने कहा कि कस्बे में बनाए गए नाले नियमों के अनुसार ढके हुए हैं। सफाई करने में परेशानी ना हो इसके लिए नियमों के अनुसार 40 प्रतिशत नाले खुले रखने होते हैं। अगर किसी के घर के बाहर नाले खुले हैं तो शिकायत की जानी चाहिए। अभी तक कोई शिकायत नहीं दी गई है। अगर शिकायत मिली तो नाले को ढका का जाएगा।

20 एमएचएम 1 नाले में डूबने से बच्ची की मौत के बाद नाल पर मौजूद लोग
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