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एलपीएस कर्मचारियों ने वेतन के लिए शहर में किया प्रदर्शन, डीसी, सहकारिता मंत्री व कंपनी संचालक से बगैर मिले लौटे
-शहर के सेक्टर एक में कंपनी संचालकों के घर पहुंचे कर्मचारियों ने नारेबाजी के जरिए प्रकट किया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मेहनत के चार महीने बाद भी मेहनताना न मिलने से आहत एलपीएस प्लांट टू के कर्मचारियों ने बुधवार को शहर की सड़कों पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने हक के लिए कंपनी से सेक्टर तक जुलूस निकाला। इस बीच न्याय की गुहार लगाने के लिए उपायुक्त, सहकारिता मंत्री व कंपनी संचालक से मिलने का प्रयास किया, मगर पुलिस सुरक्षा के चलते उन्हें बेरंग लौटना पड़ा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने भी छोटूराम चौक से लघुसचिवालय तक ही उनका साथ दिया। इसके बाद वे भी चले गए।
कर्मचारियों ने अपने वेतन को लेकर नाराजगी प्रकट करते हुए शासन व प्रशासन को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कंपनी जानबूझ कर कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रही है। अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी अनजान हैं। कंपनी के कर्मचारी पिछले चार महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। वेतन न मिलने के कारण घर खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया है। इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों व कंपनी संचालकों से कई बार बातचीत की जा चुकी है। इसके बावजूद समाधान नहीं किया जा रहा है। मजबूरन कर्मचारियों को सड़क पर उतरना पड़ा है।
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उपायुक्त के मिलने का प्रयास, दरवाजे बंद किए गए
बुधवार को कर्मचारियों ने उपायुक्त से मिलने का प्रयास किया तो दरवाजें बंद कर दिए गए। इसके बाद सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर से मिलने उनके निवास की ओर जाने लगे तो यहां भी पुलिस ने रोक दिया। बेरिकेड्स लगाकर मंत्री निवास का रास्ता ही बंद कर दिया। इसके बाद सभी सेक्टर एक स्थित कंपनी संचालक के घर पहुंचे। यहां भी पुलिस बल तैनात रहा। इसके चलते कंपनी संचालक से बात नहीं हो पाई। दिन भर के प्रयास के बाद भी कर्मचारियों की बात नहीं सुनी गई। इस कारण प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। कर्मचारियों ने कहा कि उनका हक नहीं मिला तो मजबूरन सड़क जाम करनी पड़ेगी।
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जनता की बात को अनसुनी कर रही सरकार : तंवर
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर छोटूराम चौक पर एलपीएस कर्मचारियाें के प्रदर्शन में शामिल हुए। यहां से पैदल चलते हुए लघु सचिवालय तक पहुंचे। लघु सचिवालय के बाहर प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सरकार जनता की बात को अनुसना कर रही है। कर्मचारी परेशान हैं। श्रमिक बेहाल हैं। विद्यार्थी बेरोजगार हैं। हर तरफ असुरक्षा का माहौल नजर आ रहा है। सरकार का सारा ध्यान निजी क्षेत्र पर है। इस कारण कंपनियां व उनके संचालक लाभ कमा रहे हैं। जबकि कंपनी में काम करने वाले श्रमिक भूखे मरने को विवश हैं। उन्हें न पूरा वेतन मिल रहा है न दूसरी सुविधाएं। श्रमिक आवाज उठाता है तो उसे दबा दिया जाता है। यह तानाशाहीपूर्ण रवैया है। चुनाव में जनता का इसका जवाब देगी।
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