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पीजीआईएमएस के अधिकारियों का धर्म संकट दो दिनों से पड़ रहा भारी

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पीजीआईएमएस के अधिकारियों का धर्म संकट दो दिनों से पड़ रहा भारी
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आपरेशन थियेटर बंद कर खेला जा रहा मरीजों के जीवन से खेल

फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी वीरवार को लगातार दूसरे दिन भी धर्म संकट में उलझे रहे और मरीजों के जीवन से खेल होता रहा। लंबे इंतजार के बाद आपरेशन की तिथि मिलने के बाद भी दो दिनों से मरीजों का आपरेशन नहीं हो पा रहा है। अधिकारी दो दिनों में यह तय नहीं कर पा रहे कि उन्हें करना क्या है। क्योंकि हड़ताल पर बैठे गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन की मांग है कि संस्थान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी को हटाया जाए, जबकि अधिकारी को जांच कमेटी निर्दोष साबित कर चुकी है।
संस्थान में आने वाले मरीज पिछले दो दिनों से राम भरोसे हैं। क्योंकि यहां ओपीडी जांच, लैब जांच और आपरेशन थियेटर जैसे अनिवार्य सर्विस बाधित हो रही हैं। प्रतिदिन ओपीडी, आपातकालीन विभाग व धनवंतरी अपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सात से आठ हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसके अलावा संस्थान में प्रतिदिन 180 के लगभग आपरेशन भी होते हैं। अब स्थिति यह है कि संस्थान में आपात स्थिति वाले मरीजों को छोड़ कर कोई आपरेशन नहीं हो रहे हैं। जबकि मरीजों का दर्द है कि पहले तो डॉक्टर जल्दी आपरेशन की तिथि नहीं देते, फिर बेहोशी जांच की सहमति नहीं मिलती। अब कर्मचारियों की हड़ताल के चलते उनका कार्य फिर रुक गया है। पूछने पर डॉक्टर अगली तारीख भी नहीं दे रहे हैं क्योंकि आगामी दिनों में मरीजों के आपरेशन की तिथि पहले से ही तय है। ऐसे में उनके पास अब निजी अस्पतालों में आपरेशन करवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। सूत्रों की मानें तो वीरवार को नेत्र विभाग, ऑर्थों व सर्जरी आदि विभागों के कई आपरेशन रद हो गए। ओटी मास्टरों की हड़ताल के चलते अधिकांश आपरेशन प्रभावित रहे। संस्थान के आपरेशन थियेटरों में आपात स्थिति वाले गिने चुने आपरेशन ही किए गए।
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मरीजों का दर्द
पैर में बहुत दर्द है, पर्ची के लिए ही नंबर नहीं आ रहा है। भीड़ में कितनी देर कतार में खड़ा रहूं। यहां कोई सुनने वाला नहीं है।
- राजेश, पानीपत

किडनी, शुगर की बीमारी है। पैर सड़ रहा है, लेकिन नंबर ही नहीं आ रहा है। पता चला है कि हड़ताल है। अब मरीजों की कौन सुनेगा।
- बिमला बैरागी

पैर का आपरेशन होना था, इसके लिए सारा सामान मंगाया गया, अब डॉक्टर वापस करने को कह रहे हैं। मरीज के दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है।
- अजमेर

सीधे पैर का आपरेशन होना था, डॉक्टर ने वीरवार की तिथि दी थी। लेकिन बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की हड़ताल के चलते आपरेशन नहीं हो पाएगा।
- इंद्रजीत, अमृत कॉलोनी

सीधे हाथ का आपरेशन होना था। रात से खाली पेट रखा गया और सुबह गाउन पहनाया गया। बाद में बताया गया कि आज आपरेशन नहीं हो पाएगा।
- मंजीत

समस्या के चलते अस्पताल आए कि दर्द से राहत मिलेगी। अब पता चला है कि हड़ताल के चलते आपरेशन अटक गया है।
- जोगेंद्र

पित्त की थैली का आपरेशन कराना था, लेकिन हड़ताल के चलते नहीं हो पा रहा है। दर्द अधिक है, कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।
- संतोष, सोनीपत

विजय पार्क के अलावा कुलपति कार्यालय के बाहर गरजे कर्मचारी
मुख्य सुरक्षा अधिकारी ईश्वर शर्मा को हटाने की मांग को लेकर वीरवार को भी गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन के कर्मचारी विजय पार्क में धरने पर बैठे रहे। प्रधान सुरेश ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को कहा है कि यदि वह सुरक्षा अधिकारी की दुबारा जांच कराने का आश्वासन देते हैं तो तीन डॉक्टर वह तय कर लें और तीन कर्मचारी उनके भी होने चाहिए। इसके साथ ही प्रधान ने स्पष्ट कहा कि वह उस दिन तक काम पर नहीं लौटेंगे, जब तक सुरक्षा अधिकारी को हटा नहीं दिया जाता। प्रधान ने बताया कि वीरवार को सीनियर प्रोफेसर डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो के अलावा आरडीए प्रधान डॉ. जंगबीर ग्रेवाल और जरनल सेक्रेटरी डॉ. गौरव नांदल भी उनके पास आए थे। इन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि उनकी लड़ाई में जरूरत पड़ती है तो वह उनके साथ हैं। संस्थान में जो कर्मचारी के साथ मारपीट हुई हैं वह गलत है। वहीं मौके पर सर्व कर्मचारी संघ ने भी हड़ताली कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया है। सुरेश प्रधान ने बताया कि वह ऑल हरियाणा यूनिवर्सिटी फेडरेशन से भी अपनी इस लड़ाई में सहयोग मांगने की तैयारी कर रहे हैं। मरीजों के हित को ध्यान में रखकर वह आपात सेवाएं अभी बाधित नहीं होने देंगे, बाकी हड़ताल जारी रहेगी।

धर्म संकट में फंसे हैं अधिकारी
कर्मचारियों में रोष है कि सुरक्षा अधिकारी व उनके गार्डों ने एक पक्के कर्मचारी के साथ एक महिला के शक करने के आधार पर मारपीट की और उसे पुलिस के हवाले किया। इस संबंध में सुरक्षा अधिकारी को जांच के दौरान एक सप्ताह के लिए फोर्स लीव पर भेजा गया। जांच के दौरान जब अधिकारी निर्दोष साबित हुआ तो उन्हें वापस ज्वाइन करा दिया गया। अब कर्मचारी फिर विरोध कर रहे हैं कि वह किसी भी सूरत में ईश्वर शर्मा को संस्थान में नौकरी नहीं करने देंगे। अधिकारी अब धर्म संकट में हैं कि वह कर्मचारियों के दबाव में किसी को बगैर सबूत कैसे सजा दे दें।

चुप्पी साधे हैं संस्थान
पूरे प्रकरण में संस्थान के अधिकारियों ने कोई भी जवाब देने की बात पर चुप्पी साध ली है। दो दिन से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने के बाद भी प्रशासन अभी तक यह आंकड़ा नहीं जुटा पाया है कि कितने मरीजों को नुकसान हुआ है और आने वाले समय में इस समस्या से निपटने की क्या तैयारी रहेगी। अभी गनीमत है कि कांट्रेक्ट के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं आए हैं, इसके चलते काम चल रहा है। ठेका कर्मियों का कहना है कि पक्के कर्मचारी कभी उनके लिए आगे नहीं आते तो वह क्यों उनकी वजह से अपनी नौकरी खतरे में डाले।

कुलपति कार्यालय का बना दिया मजाक
हड़ताली कर्मचारियों ने वीरवार सायं कुलपति कार्यालय का मजाक बना दिया। कर्मचारी रिक्शा पर माइक लेकर कार्यालय के अंदर घूस गए। इसी दौरान सभी सुरक्षा कर्मचारी साइड में खडे़ हो गए। स्थिति यह रही माइक पर कर्मचारी अधिकारियों के बारे में अनाप-शनाप बोलते रहे। तेज आवाज से बचने के लिए कुलपति कार्यालय के कर्मचारियों ने अपने सभी दरवाजे बंद कर लिए और अंदर अपना कार्य जारी रखा।
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प्रधान स्वयं नियमों को नहीं मानते, दूसरों से क्यों उम्मीद करते हैं : सुधीर
पीजीआईएमएस के पूर्व परिवहन अधिकारी सुधीर कत्याल ने बताया कि गैर शिक्षक कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान चालक सुरेश स्वयं नियमों को नहीं मानते, वह दूसरों से क्या उम्मीद करते हैं। सुधीर ने रोष जताते हुए बताया कि उसने प्रधान के खिलाफ नौ मई को वीसी और रजिस्ट्रार को शिकायत दी थी कि ट्रांसपोर्ट कार्यालय में उसे सुरेश चालक ने गाली दी और जान से मारने की धमकी दी। इसकी शिकायत उसने डॉ. बीएम वशिष्ठ को भी दी, लेकिन वह प्रधान को बचाने के प्रयास में जुटे हैं। जब उनसे पूछो शिकायत का क्या हुआ तो वह कहते हैं कि अभी जवाब नहीं आया है। जबकि प्रधान ने स्वयं उसको जान से मारने की धमकी दे रखी है। सूत्रों की मानें तो प्रधान की ओर से दी गई जान से मारने की धमकी कभी भी उन्हें भारी पड़ सकती है।
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