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नए शैक्षणिक सत्र में फिर सताएगा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का दर्द

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नए शैक्षणिक सत्र में फिर सताएगा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का दर्द
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी के बजाय अपनी किताबें लगवाने के लिए प्रकाशकों ने तेज किए संपर्क
पिछले साल एक दर्जन स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाए जाने के मामले में अब तक नहीं हुई कार्रवाई
विकास सैनी
रोहतक
नए शैक्षणिक सत्र में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का दर्द अभिभावकों को फिर सताएगा। इस बार भी विद्यार्थियों को एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें ही पढ़नी होंगी। निजी प्रकाशकों ने अपने मुनाफे के चक्कर में स्कूलों में संपर्क तेज कर दिया है। स्कूलों को किताबें व कापियां मुहैया कराने को लेकर शहर में बड़े स्टोर भी बना लिए गए हैं। जबकि प्रशासन इस ओर से निश्चिंत है। पिछले वर्ष शहर के 14 नामी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाने जाने का खुलासा होने के बावजूद इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। इस बारे में एक जनवरी को भी उपायुक्त ने पत्र एडीसी के नाम जारी किया है। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी मौन हैं।
100 से 400 रुपये किताबें खरीदनी होंगी
निजी स्कूलों में इस बार भी निजी प्रकाशकों की किताबों पर लगाम कसती नजर नहीं आ रही है। स्कूलों तक प्रकाशकों की पहुंच व कमीशन के चक्कर में अभिभावकों की जेबों पर डाका डाला जाना लगभग तय है। बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों को 100 से 400 रुपये की एक किताब खरीदनी होगी। कक्षा का एक सेट तीन हजार से पांच हजार रुपये तक मिलेगा। पिछले वर्ष भी निजी प्रकाशकों की किताबों के यही दाम थे।
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सस्ती हैं एनसीईआरटी की किताबें
स्कूली शिक्षा को लेकर एनसीईआरटी ने सिलेबस जारी किया हुआ है। इसके तहत पुस्तकें छपवाई गई हैं। एनसीईआरटी की ही किताबें सभी स्कूलों में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। यही हरियाणा व सीबीएसई बोर्ड के भी नियम हैं। यह किताबें निजी प्रकाशकों की किताबों से बेहद सस्ती हैं। एनसीईआरटी की एक किताब पर 25 से 50 रुपये तक का खर्च आता है। लेकिन इन नियमों का कहीं पालन नहीं हो रहा है।
14 निजी स्कूलों को क्यों बचा रहा प्रशासन
निजी स्कूलों में नियमों की हर स्तर पर अवहेलना हो रही है। इसमें निजी प्रकाशकों की किताबों व स्कूल की अपनी कापियां मुख्य हैं। अभिभावक के लिए इन्हें स्कूल से ही खरीदना अनिवार्य है। कमीशन के खेल में नियमों से हो रहे खिलवाड़ को लेकर पिछले साल अभिभावक संघ ने आवाज उठाई थी। इसके बाद मंडल आयुक्त चंद्रप्रकाश ने कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत कई स्कूलों में छापे मारे गए। इस दौरान 14 स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाए जाने का खुलासा हुआ। यह रिपोर्ट डीईओ के बाद उपायुक्त की टेबल तक पहुंची, मगर कार्रवाई नहीं हुई। संघ ने सात दिसंबर को इस बारे में उपायुक्त से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की तो एक जनवरी को एडीसी के नाम पत्र जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद भी कार्रवाई का इंतजार है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों का हौसला बुलंद है।
संघ ने चलाया जागरुकता अभियान
निजी स्कूलों में मची लूट को लेकर अभिभावक संघ इस बार लोगों को बचाने के लिए जागरुकता अभियान छेड़ा है। इसी कड़ी में मंगलवार को पुरानी आईटीआई पार्क में लोगों से संपर्क कर उन्हें वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, फार्म-6, शिक्षा अधिकार अधिनियम की जानकारी दी गई। शाम को मानसरोवर पार्क में बैठक निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशकों की पुस्तकें पढ़ाए जाने का विरोध किया गया। यह लूट नहीं रुकने पर संघ आंदोलन करेगा। इस मौके पर यशवंत कुमार, देवेंद्र अटकान, ओमप्रकाश शर्मा, सुनील, अनिल गर्ग, रणधीर भारद्वाज, सत्यनारायण हुड्डा, राजीव, धर्मबीर देशवाल, कुलदीप सिंधू, राजेंद्र सिंह, रामकला, रतन सिंह, संतलाल, राजाकृष्ण, पवन मौजूद रहे।
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आज उपायुक्त से मुलाकात करेगा संघ
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ाई जा रही हैं। इसे लेकर अभियान चलाया जाएगा। पिछले वर्ष भी अभिभावक संघ ने यह मुद्दा उठाया था। जांच हुई तो 14 स्कूलों में निजी किताबें पढ़ाए जाने की बात सामने आई। इस मामले में कार्रवाई के निर्देश हुए करीब सात से आठ महीने हो चुके हें। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक अधिकारी बार बार समय मांग रहे हैं।
-यशवंत कुमार, अध्यक्ष, अभिभावक संघ, वेलफेयर सोसायटी।
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