फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विकास में फिसड्डी, झगड़े में अगड्डी, नाम रेवाड़ी नगर परिषद

विज्ञापन
विज्ञापन
नाम रेवाड़ी नगर परिषद : विकास में फिसड्डी, झगड़े में अगड्डी, ,,,,5,6
विज्ञापन

रेवाड़ी। विकास में फिसड्ड़ी और झगड़े में अगड्डी। मेरा नाम है रेवाड़ी नगर परिषद। यह कहावत आजकल शहर के हर व्यक्ति की जुबां पर है। यह कहावत यूं ही नहीं बनी। दरअसल प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के साथ रेवाड़ी की नगर परिषद का बुरा दौर शुरू हो गया। उठापटक के बीच यहां कोई भी विकास कार्य सिरे नहीं चढ़ सका। अब हाल नया विवाद जनसंख्या सर्वे को लेकर खड़ा हो रहा है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार वर्ष 2014 में बनी। उस समय नगर परिषद की चेयरपर्सन कांग्रेस की शकुंतला भांडोरिया थी। इसके बाद भ्रष्टाचार के मामले को लेकर चली तनातनी के बीच गत वर्ष भांडोरिया को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। इस बीच नगर परिषद करोड़ों रुपये के टेंडर अटके रहे। इसके बाद भाजपा की विनीता पीपल नगर परिषद की नई चेयरपर्सन बनी। उस समय लोगों को रुके हुए काम पूरे होने की आस जगी, लेकिन उनकी आस पर फिर पानी फिर गया। भाजपा के ही दूसरे खेमे के लोग फिर नगर परिषद के विकास कार्यों को लेकर अड़ंगा लगाते दिखे। हालांकि जांचों में आरोपों में कुछ सत्यता भी मिली। इसी का कारण रहा की जांच के बाद अनुमानित कोस्ट पहले के मुकाबले आधी चली गई।
विज्ञापन

ये रहे विवाद
सबसे पहले शहर के प्रमुख चौराहों के सौंदर्यीकरण का मामला गूंजा। यह कार्य आठ दिसंबर 14 को मंजूर हुए, लेकिन 10 जनवरी 15 को ही एक भाजपा पदाधिकारी ने कार्य में घपले की आशंका जताते हुए इसकी शिकायत दी। इसके बाद करीब दस माह तक चली जांच के बाद कार्य का एस्टीमेट 30 लाख 12 हजार रुपये से घटकर 15 लाख 78 हजार रुपये पर पहुंच गया। यह जांच वर्ष 2017 तक चली। इससे पहले शहर में लगे स्वागत बोर्डों को लेकर भी कई तरह के आरोप लगे। जांच के बाद इनका भी एस्टीमेट घटा। 11 जून 2017 को 314 कार्यों की ई-टेंडरिंग में भी गबन के आरोप लगे। इसमें ठेकेदारों पर नगर परिषद के कर्मचारी से मिलीभगत कर चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने का आरोप लगा था। इस मामले की अभी जांच चल रही है।
अब जनसंख्या सर्वे को लेकर नया विवाद
इन विवादों के बीच अब एक नया विवाद जनसंख्या सर्वे को लेकर आया है। जनसंख्या सर्वे का टैंडर 15 नवंबर को नगर परिषद में जमा हुए। कुछ दिन पूर्व ही यह टेंडर छोड़ दिए गए। आरोप है कि नगर परिषद ने 37.80 पैसे लेने वालों की बजाय 63 रुपये चार्ज करने वाले बोलीदाता को टेंडर दे दिया। जिससे सरकारी राजस्व को 15-20 लाख रुपये चूना लग सकता है। मामले की शिकायत एक रिजेक्ट की गई कंपनी ने सीएम से निकाय मंत्री तक की है। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद की ओर से 40 हजार घरों की जनसंख्या का सर्वे होना है।
इस तरह लगा आरोप
शिकायत में बताया है कि नियमानुसार बोली दाता कम से कम तीन होने चाहिए। लेकिन नगर परिषद रेवाड़ी में दो कंपनी को रिजेक्ट कर एक कंपनी को टेंडर छोड़ दिया गया। यह नियमानुसार गलत है। वहीं दूसरी ओर कंपनी के टर्न ओवर की न्यूनतम सीमा एक करोड़ रखी गई थी। वहीं कंपनी को जाआइएस टैक्नालॉजी आधारित होना जरूरी था। लेकिन मनमाने नियम बना टेंडर खोल दिया गया।
विज्ञापन

वर्जन-
हमारी कंपनी सभी शर्तें पूरी करती है। रोहतक, पंचकूला में यही काम हम कर रहे हैं। लेकिन रेवाड़ी मेें मनमाने से हमारी बिड को रिजेक्ट कर दिया गया। हमने एक यूनिट के सर्वे की कीमत भी हमारी ओर से 37.80 पैसे रखी गई थी। जबकि टेंडर 63 रुपये चार्ज करने वाली कंपनी को दे दिया गया। इसी के साथ सिंगल बिडर को टेंडर देना भी कानूनी रूप से गलत है।
नितिन शर्मा, संचालक, साई कंस्ट्रक्शन कंपनी।
-------------
अभी किसी को वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया है। यदि किसी भी तरह की खामी हुई है तो जांच की जाएगी।
मनोज यादव, ईओ, नप रेवाड़ी।
-------------
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें