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लॉजिस्टिक हब: ‘राजनीति’ ने विकास को लगाया ग्रहण
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प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
बावल में मल्टी लॉजिस्टिक हब के लिए जमीन अधिग्रहण रद्द होने के बाद अब नारनौल के नांगल चौधरी में इसके बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए बाकायदा जमीन खरीदी जा रही है। अब मल्टी लॉजिस्टिक हब का फायदा हमारा पड़ोसी उठाएगा। यह लॉजिस्टिक हब बावल में बनता तो रोजगार के साथ क्षेत्र की भी उन्नति होती। उद्योगपतियों का कहना है कि किसानों को भड़काकर विपक्षी दलों ने क्षेत्र का नुकसान करवाया है। इसके लिए जिले के लोगों ने संघर्ष किया अब महेंद्रगढ़ को इसका फायदा मिलेगा। करीब 10 वर्ष पूर्व बावल में लॉजिस्टिक हब बनने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जमीन भी एक्वायर कर ली गई। करीब 3600 एकड़ में बनने वाले इस लॉजिस्टिक हब के लिए सेक्शन नौ की कार्रवाई भी हो गई। जमीन के भाव को लेकर किसान नाराज हुए। काफी दिनों तक आंदोलन भी चला। आखिर वर्ष -2016 में यह लॉजिस्टिक हब यहां बनना रद्द हो गया। मौका देखकर नांगल चौधरी विधायक अभय सिंह ने इसे अपने यहां बनवाना स्वीकृत कर लिया। ऐेसे में बावल में होने वाला बहुत बड़ा विकास हाथों से खिसक गया।

होना था बहुत बड़ा काम
इस मल्टी लॉजिस्टिक हब के लिए 3600 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें 1200 एकड़ में तो लॉजिस्टिक हब और शेष में कंपनियां और गोदाम आदि बनते। इसके लिए बाकायदा रेलवे लाइन बिछती। इससे सामान आसानी से यहां उतारा जाता। यहां से सामान लोडिंग और अनलोडिंग होता। बाकायदा वेयर हाउस बनाया जाता। इससे सामान लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। इसके बाद सामान को कांडला सहित अन्य बंदरगाहों तक लाने-ले जाने का काम होता।
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रोजगार के अवसर होते पैदा
इसके बनने से हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। कई नए-नए तरह के काम शुरू होते। धारूहेड़ा और बावल स्थित कंपनियों को भी सीधा सा लाभ होता। अभी जो यह सामान गुरुग्राम या कांडला तक ले जाने की परेशानी होती है। वह यहीं पर हल हो जाती। इससे बावल ही नहीं पूरे रेवाड़ी का लाभ होता। रेवाड़ी में इस मल्टी लॉजिस्टिक हब के रद्द होने के बाद इसे नारनौल में बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। एचएसएसआईडी इसके लिए वहां 1200 एकड़ में जमीन खरीदने की प्रक्रिया कर रहा है। बावल में जहां जमीन अधिग्रहण की गई थी, वहीं सीधा किसानों से जमीन खरीदी जा रही है। बताया जा रहा है कि वहां से मिले प्रोत्साहन के बाद ही वहां पर लॉजिस्टिक हब बनाने का निर्णय किया गया।

किसानों पर पड़ी दोहरी मार
लॉजिस्टिक हब के लिए अधिग्रहीत जमीन का किसानों ने भाव कम बताकर खासा विरोध किया। किसानों ने इस जमीन के एवज में राजस्थान सहित अन्य जगह जमीनों के बयाने भी दे दिए। उन्हें लगा कि जब यह जमीन जाएगी तो उसके बदले वे वहां जमीन ले लेंगे। अधिग्रहण रद्द होने के बाद विकास तो रुका ही साथ में उनके बयाने का पैसा भी वहीं फंस गया।

हमारी सरकार ने यहां लॉजिस्टिक हब बनाने के पूरे प्रयास किए। सारी प्रक्रियाएं भी पूरी हो गई लेकिन विपक्षी दलों ने किसानों को भड़काकर इस काम को रुकवा दिया। इसके बाद यह लॉजिस्टिक हब अब नारनौल में बन रहा है। - चौ. जसवंत, पूर्व मंत्री
किसानों के विरोध को देखकर सरकार ने जमीन अधिग्रहण रद्द कर दिया था। अगर यहां लॉजिस्टिक हब बनता तो बहुत लाभ होता। रोजगार के अवसर पैदा होते। विकास को गति मिलती। - डॉ. बनवारीलाल, जनस्वास्थ्य राज्यमंत्री
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बावल में लॉजिस्टिक हब बनना रद्द होने के बाद नांगल चौधरी में इसका बनना स्वीकृत हुआ है। इसके लिए जमीन लेने की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। - एसएस लांबा, सीनियर मैनेजर इस्टेट, एचएसएसआईडीसी
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